Monday, March 20, 2017

आन्तरिक सुरक्षा का बजट

भारत सरकार ने आन्तरिक सुरक्षा का बजट इस बार बहुत बढ़ा दिया है,
इसका मतलब बिल्कुल साफ है,
आदिवासी इलाकों में और ज़्यादा सैनिक भेजे जायेंगे,
सैनिक जंगलों में आदिवासियों को सुरक्षा देने के लिये नहीं भेजे जाते,
ये सैनिक आदिवासी की ज़मीन, जंगल और पहाड़ की रक्षा करने के लिये नही भेजे जाते,
बल्कि ये सैनिक इससे उलटे काम करने के लिये भेजे जाते हैं,
ये सैनिक आदिवासियों की ज़मीनों, जंगलों और पहाड़ों पर कब्ज़ा करने के लिये भेजे जाते हैं,
ताकि उन ज़मीनों, पहाड़ों और खनिजों को अमीर पूंजीपतियों की कम्पनियों को सौंपा जा सके,
सैनिक और बढ़ेंगे,
यानि आदिवासियों का दमन और अत्याचार अभी और बढ़ेगा,
पत्रकारों पर हमले बढ़ेंगे,
वकीलों, साहित्यकारों, मानवाधिकार कार्यर्ताओं को माओवादी कहने का चलन बढ़ जायेगा,
आदिवासी इलाकों में लोकतांत्रिक गतिविधियां और भी असंभव हो जायेंगी,
अभी भी जब आदिवासी विरोध प्रदर्शन के लिये बाहर आने की कोशिश करते हैं तो हज़ारो सिपाही जंगलों में ही आदिवासियों का रास्ता रोक लेते हैं,
मोदी छत्तीसगढ़ जाकर कहते हैं कि आदिवासी युवाओं को हथियार छोड़ कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेना चाहिये,
लेकिन लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में भाग लेने वालों पर हमले करवाते हैं,
अभी अमीर पूंजीपतियों के लिये सत्ता और नाटक खेलेगी,
आपका ध्यान आदिवासी इलाकों में चलने वाले हमलों से हटाने के लिये हिन्दु मुस्लिम तनाव बढ़ाया जायेगा,
यह नक्सलवाद का मामला नहीं है,
आज़ादी के बाद से आज तक एक भी जगह बिना सिपाहियों की मदद के आदिवासियों की ज़मीन पर कब्जा हुआ ही नहीं है,
इसलिये गरीबों के बच्चों को सिपाही बना कर दूसरे गरीबों को मारने भेजा जा रहा है,
आगे की कहानी बहुत खून और आंसुओं से भरी है,
एक लम्बी लड़ाई के लिये कमर कस लीजिये,
हम इसे रोकने मे अपनी पूरी ताकत लगा देंगे,
हम समझते हैं इस सब को,
इसलिये जीतेंगे हम ही,

No comments:

Post a Comment