Sunday, July 3, 2016

समझौता एक्सप्रेस


सन २००७ में पाकिस्तान जाने वाली ट्रेन समझौता एक्सप्रेस में धमाका हुआ था ၊
इसमें ६६ पाकिस्तानी नागरिक मारे गये थे ၊
भाजपा ने शोर मचाया और कहा कि यह धमाका पाकिस्तानी आतंकवादियों और मुस्लिम छात्र संगठन सिमी नें किया है ၊
बाद में इन धमाकों में स्वामी असीमानन्द को गिरफ्तार किया गया
जेल में एक मुस्लिम युवक की सेवा से असीमानन्द का ह्रदय परिवर्तन हो गया
उस निर्दोष मुस्लिम छात्र को असीमानन्द के अपराध में फर्जी तौर पर फंसा दिया गया था
स्वामी असीमानन्द नें कोर्ट के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया
स्वामी असीमानन्द नें बताया था कि उसने यह बम धमाका राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता मोहन भागवत के कहने से किया था ၊
स्वामी असीमानन्द के फोटो नरेन्द्र मोदी के साथ भी हैं
स्वामी असीमानन्द नें बाद में मालेगांव और मक्का मस्जिद समेत कई आतंकवादी घटनाओं में खुद के शामिल होने की बात कबूल की थी
स्वामी असीमानन्द के साथी साध्वी प्रज्ञा और सेना के अधिकारी कर्नल पुरोहित को भी पकड़ा गया
इन घटनाओं की जाँच करने वाले पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे की हत्या कर दी गई ၊
अभी हाल ही में मोदी सरकार नें साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को रिहा कर दिया गया
सरकारी एजेंसी नें मारे गये पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे को झूठा कहा
अभी परसों एक टीवी चैनल न्यूज एक्स नें पूर्व पुलिस
अधिकारी विकाश नारायण राय का इंटरव्यु रिकार्ड किया
विकाश नारायण राय समझौता एक्सप्रेस बम धमाका कांड के लिये बनाई गई जांच समिति के सदस्य थे
विकाश नारायण राय नें इंटरव्यु में बताया कि समझौता एक्सप्रेस धमाके में सिमी या पाकिस्तान के शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला था
बल्कि धमाके में हिन्दुत्व आतंकवादियों का हाथ होने के सुराग मिले थे
लेकिन इस टीवी चैनल नें विकाश नारायण राय का यह इंटरव्यु दिखाया ही नहीं
बल्कि चैनल का एंकर और भाजपा के प्रवक्ता इस घमाके के लिये पाकिस्तान और सिमी को जिम्मेदार बताते रहे
असल में यह संध और भाजपा की पुरानी चाल है ၊
ये लोग भारत की सत्ता अपने हाथ में लेने के लिये हिन्दुओं को डराने का काम करते हैं
उसके लिये ये खुद ही आतंकवादी हरकतें करते हैं
और झूठा इल्ज़ाम मुसलमानों पर लगा देते हैं
इनका पर्दाफाश करना ज़रूरी है
तभी देश में शान्ति और प्रेम बचेगा

आदिवासी की गाय

आदिवासी अपनी गाय को बेहद प्यार करते हैं ၊
उनकी गाय इधर उधर हो जाती है तो दूर दूर तक उसे खोजने जाते हैं ၊
वे उन लोगों की तरह नहीं है जो अपनी गाय को दूध देना बन्द करने पर मरने के लिये छोड़ देते हैं ၊
और ना ही आदिवासी गाय के नाम पर किसी की हत्या करते हैं ၊
बस्तर के आदिवासी गाय का दूध नहीं निकालते ၊
क्योंकि वे मानते हैं कि मां का दूध बच्चे के लिये होता है၊
और गाय का दूध बछड़े के लिये होता है ၊
छतीसगढ़ में भाजपा के गुन्डे आजकल आदिवासियों की गाय लूट कर पैसा कमा रहे हैं ၊
जब आदिवासी बाज़ार से अपनी गाय या बैल लेकर एक गांव से दूसरे गांव जाते हैं तो ये हिन्दुत्व के गुंडे आदिवासियों पर हमला बोल देते हैं ၊
ये लोग गोरक्षा के नाम पर इनके गाय बैल लूट कर बेच देते हैं ၊
राज्य में भाजपा का शासन होने के कारण पुलिस इन भगवा गुण्डों का साथ देती है ၊
कई बार आदिवासी मेरे पास आये ၊
मैनें पुलिस को शिकायत भी करी ၊
एक बार मैनें वरिष्ठ आईपीएस दीपांशु काबरा को भी फोन किया था ၊
लेकिन उन्होंने आदिवासियों की कोई मदद नहीं करी ၊
आजकल बस्तर में गांव गांव में बोर्ड लगा दिये गये हैं जिन पर लिखा होता है कि इस गांव में गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है
इस तरह का बोर्ड लगाने वाले गुण्डे कंपनियों के लिये आदिवासियों की छीनने का काम भी कर रहे हैं
जो आदिवासी ज़मीन छीनने का विरोध करता है ये गुण्डे उसे नक्सली घोषित कर के जेल में डलवा देते हैं
पुलिस इन गुण्डों के साथ मिलकर काम कर रही है ၊
इस तरह छत्तीसगढ में कम्पनियां गुण्डे और पुलिस मिल कर आदिवासियों की ज़मीनें छीन रहे हैं
छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री रमन सिंह कम्पनियों से पैसे लेकर पनामा में कम्पनियों में लगा रहा है
पूरा खेल उसी के इशारे पर खेला जा रहा है

क्या सचमुच आप देशभक्त हैं ?


आप अपनी सिपाहियों पर गर्व करते हैं
आपके सिपाही भले ही निर्दोष नागरिकों की हत्या करे
चाहे आपके सिपाही देश की महिलाओं से बलात्कार करें
कौन हैं आप ?
ध्यान से देखिये ?
देखिये आप दलित नही हैं
आप आदिवासी भी नही हैं
आप अल्पसंख्यक भी नही हैं
आप मज़दूर भी नहीं हैं
आप सवर्ण है
आप समृद्ध हैं
आप बहुसंख्य हैं
आप का घर सिपाहियों नें नहीं जलाया
आपकी बहन के साथ सिपाहियों नें सामूहिक बलात्कार भी नहीं किया
आप दिन भर मजदूरी करने के बाद पुलिस की मार भी नहीं खाते
आप क्यों नहीं करेंगे सिपाहियों पर गर्व
आप कश्मीरी नही हैं
आप मणिपुरी नहीं हैं
आप बस्तरिया
झारखण्डी या उड़िया नहीं हैं
लेकिन कश्मीर पर सिपाहियों की बन्दूकों के दम पर कब्जे से आप बहुत खुश हैं
बस्तर में आदिवासियों की जमीनों पर सिपाहियों के दम पर उद्योगपतियों के कब्जे से आप बहुत खुश हैं
पूरी मज़दूरी मांगने वाले मज़दूरों की सिपाहियों द्वारा पिटाई से आप बहुत खुश हैं
बराबरी के लिये सर उठाने वाले दलितों को सिपाहियों द्वारा गोली से उड़ा देने पर आप बहुत खुश हैं
आप मानते हैं कि सिपाही देश की रक्षा कर रहे हैं
आप मानते हैं कि सवर्ण शहरी समृद्ध हिन्दु पुरुष ही देश हैं
आप नहीं मानते कि पिटने वाले करोड़ों आदिवासी , दलित, मज़दूर , कश्मीरी , मणिपुरी , अल्पसंख्यक ही देश हैँ
इस लिये बहुसंख्य देश की पिटाई करने वाले सिपाहियों पर आप गर्व करते हैं
क्या सचमुच आप देशभक्त हैं ?

न्याय की ज़रुरत

आज एक लेख पढ़ रहा था जो अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प की जीत की संभावनाओं के विषय पर था
उसमें कहा गया था कि अज्ञानता के साथ जब ताकत मिल जाती है तो न्याय के लिए सबसे बड़ा खतरा खड़ा हो जाता है
यहाँ आज हम सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक न्याय की बात नहीं करेंगे
आज हम अदालतों में मिलने वाले न्याय की बात करेंगे
मैं आपको न्यायशास्त्र के बड़े सिद्धांत नहीं समझाऊँगा
मैं आज आपके साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करूँगा
एक बार मनमोहन सिंह और चिदम्बरम नें अपने एक बयान में कहा था कि माओवादी अदालतों का सहारा ले रहे हैं
यह बात उन्होंने तब कही थी जब हम छत्तीसगढ़ में सोलह आदिवासियों की हत्या का मुकदमा लेकर सुप्रीम कोर्ट में आये थे
इन सोलह आदिवासियों की हत्या सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के सिपाहियों नें करी थी
यानी बंदूक चलाना , बम फोडने को सरकार आपत्तिजनक और अलोकतांत्रिक हरकत माने तो यह बात हमें समझ में आती है
लेकिन किसी का अदालत में न्याय की मांग करना करना कैसे माओवाद हो सकता है ?
या आप मानते हैं कि किसी को आपके खिलाफ़ अदालत में जाने का भी अधिकार नहीं है ?
खैर वो मुकदमा आज सात साल से लटका हुआ है
सुकमा ज़िले के नेंद्रा गाँव की दो लड़कियों को पुलिस वाले उठा कर ले गए थे
एक लड़की के पिता को भी साथ में ले गए थे
लड़की के पिता की गर्दन काट कर पुलिस कैम्प के सामने रख दी गयी
लेकिन दोनों लडकियां कहाँ हैं इसका पता नहीं चल रहा था ?
हमने इन लड़कियों के भाइयों की तरफ से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हेबियस कार्पस की अर्जी दायर करवाई
इसमें पुलिस द्ववारा ले जाए गए व्यक्ति को अदालत में पेश करने के लिए मांग करी जाती है
जब दोनों लड़कियों के भाइयों नें अदालत में अर्जी लगाईं
तो पुलिस नें दोनों भाइयों का भी अपहरण कर लिया
पुलिस नें इन भाइयों को मार पीट कर अदालत में पेश कर दिया
इन दोनों भाइयों के वकील नें कोर्ट में कहा कि ये दोनों लड़के मेरे मुवक्किल हैं इन्हें कोर्ट में जो कहना होगा ये मेरे मार्फ़त कहेंगे
पुलिस तो इस मामले में आरोपी है क्योंकि लड़कियों को गायब करने का आरोप तो पुलिस पर ही है
और आरोपी प्रार्थी को अदालत में कैसे पेश कर सकता है ?
इस पर जज साहब नें वकील को धमकाया और कहा कि अगर आपने इस तरह अदालत के सामने बात करी तो आपका कैरियर खराब हो सकता है
यानी जज अपनी कुर्सी पर बैठ कर अपहरण करने वाले पुलिस अधिकारियों का बचाव कर रहा था
जज नें उन् लड़कों से लिखवा लिया कि हमारी बहनों के अपहरण के मामले में हमें पुलिस पर शक नहीं है
और जज नें दोनों लड़कियों का पुलिस द्वारा अपहरण का वो मुकदमा तुरंत खारिज कर दिया
सोनी सोरी को थाने में निवस्त्र किया गया
सोनी सोरी को बिजली के झटके दिए गए
इसके बाद सोनी सोरी के गुप्तांगों में पत्थर भर दिए गए
सोनी सोरी नें बताया कि उसके साथ यह सब पुलिस अधीक्षक अंकित गर्ग की मौजूदगी में और उसके आदेश पर किया गया
अब भारत का कानून क्या कहता है ?
कानून कहता है कि अगर आप पर कोई हमला करता है
तो आप थाने जायेंगे और एक शिकायत दर्ज करवाएंगे
पुलिस आपका डाक्टरी परीक्षण करवायेगी
और आरोपी को गिरफ्तार करके अदालत में पेश करेगी
और अगर पुलिस आपकी शिकायत ना दर्ज करे तो आप अदालत में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं
सोनी सोरी नें सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखी कि मेरे ऊपर इस तरह से थाने के भीतर हमला किया गया है
सोनी सोरी का मेडिकल परीक्षण कराया गया
मेडिकल कालेज ने सोनी के शरीर से पत्थर निकाल कर सुप्रीम कोर्ट को भेज दिए
सोनी का आरोप सत्य साबित हो रहा था
सुप्रीम कोर्ट को भारत के कानून का पालन करना चाहिये था
सुप्रीम कोर्ट को पुलिस को आदेश देना चाहिये कि आरोपी पुलिस अधीक्षक के खिलाफ़ रिपोर्ट लिखी जाय और उसके खिलाफ़ मुकदमा चलाया जाय
लेकिन आज चार साल बाद तक सुप्रीम कोर्ट की हिम्मत नहीं हुई है
कि वह आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ़ कार्यवाही करने का आदेश दे सके
और तो और डर कर मारे सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई ही नहीं कर रहा
छत्तीसगढ़ में जेलों में आपको ऐसे आदिवासी मिलेंगे जिहें इन आरोपों में जेल में डाला गया है कि इनके पास से चावल बनाने का बड़ा भगौना मिला
और पुलिस का मानना है कि बड़ा भगौना नक्सलवादियों के लिए खाना बनाने के लिए होता है
हांलाकि आदिवासी जब भी सामूहिक त्यौहार मनाते हैं तब वे लोग एक साथ चावल बनाते हैं
और उनकी अपनी पंचायत के पास बड़े भगौने होते हैं
लेकिन जेलों में तीन तीन साल से आदिवासी पड़े हुए हैं क्योंकि उनके पास से पुलिस को बड़े भगौने मिले
कोई इन आदिवासियों को न्याय नहीं दिला पा रहा है
क्योंकि इन आदिवासियों के लिए लिखने वाले चार पत्रकारों को छत्तीसगढ़ सरकार नें जेल में डाल दिया है
इन आदिवासियों को मुफ्त सहायता देने वाली महिला वकीलों को बस्तर छोड़ कर जाने के लिए मजबूर कर दिया गया है
आयता नामक एक आदिवासी युवक को पुलिस नें वोटिंग मशीनें लूटने के फर्ज़ी आरोप में जेल में डाला
अदालत नें आयता को निर्दोष माना और उसे रिहा कर दिया
आयता आदिवासियों के लिए आवाज़ उठाता रहा
पुलिस नें दोबारा आयता को पकड़ कर फिर से वोटिंग मशीनें लूटने के फर्ज़ी आरोप में जेल में जेल में डाल दिया
अदालत नें दुबारा निर्दोष आयता को रिहा कर दिया
इसी महीने पुलिस नें तीसरी बार फिर से आयता को पकड़ कर जेल में डाल दिया है
और उस पर वही पुराना आरोप लगाया है कि इसने वोटिंग मशीनें लूटी हैं
यानी एक ही व्यक्ति पर तीन बार वही आरोप
इसी तरह कांकेर जेल में पदमा आठ साल से बंद है
पदमा को कोर्ट नें दो बार रिहा किया है
पहली बार पुलिस नें पदमा को पदमा पत्नी बालकिशन के नाम से जेल में डाला
अदालत नें सन २००९ में पदमा को रिहा करने का आदेश दिया
लेकिन पुलिस नें पदमा को नहीं छोड़ा बल्कि
इस बार पदमा को पदमा पत्नी राजन के नाम से जेल में डाल दिया
अदालत नें दुबारा पदमा को रिहा करने के लिए २०१२ में आदेश दिया
लेकिन पुलिस नें उसे रिहा नहीं किया
इस बार पुलिस नें पदमा को पदमा पत्नी नामालूम गांव नामालूम के नाम से पकड़ कर जेल में डाला हुआ है
लेकिन एक जज नें पुलिस द्वारा इस तरह निर्दोषों को फंसाए जाने पर आपत्ति करी
सुकमा ज़िले में प्रभाकर ग्वाल नामक एक दलित जज नें पुलिस की हरकतों पर आपत्ति करी
निर्दोष आदिवासियों को पुलिस वाले अपनी तरक्की और नगद इनाम के लिए जेलों में डालते हैं
जज प्रभाकर ग्वाल नें इस सब पर आपत्ति करी
इस पर पुलिस वालों नें हाई कोर्ट को इन जज साहब के खिलाफ़ शिकायत भेज दी
हाई कोर्ट नें जज साहब को नौकरी से निकाल दिया
यानी अगर आप पुलिस और सरकार के अन्याय में शामिल होंगे तभी आप जज बने रह सकते हैं
अगर आपनें कानून की किताबों के अनुसार न्याय करने की कोशिश करी तो आपको निकाल कर बाहर कर दिया जाएगा
मेरे पास अन्याय के ढेरों अनुभव हैं
न्याय के लिए लड़ाई की ज़रूरत इन्हीं अनुभवों से पैदा होती है

बारह साल की बच्ची


वह बारह साल की बच्ची है
चलिये हम उसका नाम सपना रख लेते हैं
जैसे हमने उसे दामिनी कहा था
वह छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले में रहती है
वह बड़ी होकर पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी
वह छठवीं कक्षा में पढ़ती है
लेकिन दुर्भाग्य से वह आदिवासी है
छत्तीसगढ़ में आजकल आदिवासी होना अपराध है
कल रात को जब वह अपने घर में अकेली थी
सीआरपीएफ के एक सिपाही नें घर में घुस कर इस बच्ची के साथ बलात्कार किया
आज इस बच्ची के माँ बाप इसे लेकर सोनी सोरी के पास आये हैं
सोनी नें अपने वकील के साथ इस बच्ची और उसके माँ बाप को थाने में भेजा है
पास के जारम सीआरपीएफ कैम्प के सिपाहियों द्वारा इस गाँव की लड़कियों के साथ बलात्कार की यह तीसरी घटना है
कहने की ज़रूरत नहीं है कि आज तक किसी बलात्कारी सिपाही को गिरफ्तार ही नहीं किया गया
शुक्र है वह हमारी अपनी बेटी नहीं है और ना ही हमारे जैसी दिखती है
जहां इस देश नें हजारों आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार पर चूं नहीं करी
इस बच्ची के साथ बलात्कार पर भी हम सब सभ्य भारतीय चुप ही रहेंगे

हम अपने सैन्य बलों को क्रूर बना रहे हैं


हम अपने सैन्य बलों को क्रूर बना रहे हैं
क्योंकि नियम का पालन करने वाले सैन्य बल आपके किसी काम के नहीं हैं
पूरी मजदूरी की मांग करने वाले मजदूरों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर गोली चलाने का आदेश मिलने के बाद अगर कोई सैनिक दया से भर जाए और गरीबों पर गोली चलाने से मना कर दे तो उसे नौकरी से नहीं निकाल दिया जाएगा क्या ?
अगर आदिवासियों की मांग मान कर उनकी ज़मीनें छीनने के लिए उनकी हत्याएं और आदिवासी महिलाओं से बलात्कार करने से सिपाही मना कर दें तो उन्हें माफ कर दिया जाएगा ?
हम सिपाहियों के खिलाफ़ नहीं हैं
हम सिपाहियों को आदेश देने वाली सत्ता के खिलाफ़ हैं
क्योंकि वह आपकी सत्ता है
और आप कौन हैं ?
आप बड़ी जाति के , बिना मेहनत के समृद्ध बने हुए ,बहुसंख्य सम्प्रदाय के हैं
आपके मन में दलितों के प्रति नफरत है
आपके मन में गरीबों के लिए नफरत है
आपके मन में अल्पसंख्यकों के प्रति नफ़रत है
आपके मन में औरतों की आज़ादी के प्रति नफ़रत है
आप ही देश के शासक वर्ग हैं
इसलिए जब आपके सिपाही आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार करते हैं तो आपको बिलकुल भी परेशानी नहीं होती
आपके सिपाही जब अल्पसंख्यकों को मार देते हैं तब आपको कोई परेशानी नहीं होती
एक अंतर्राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक मानवाधिकारों के प्रति सबसे ज़्यादा तिरस्कार का भाव भारत में पाया गया है
भारत के लोगों का मानना है कि अगर पुलिस बिना अदालत जाए किसी को सीधे गोली मार देती है तो हम उसका समर्थन करेंगे
हमारे देश के कुछ इलाकों में तो हमने अफ्प्सा नाम का कानून बनाया हुआ है कि सिपाही अगर किसी महिला के साथ बलात्कार करे या किसी की हत्या कर भी दे तो पीड़ित नागरिक बिना सरकार की इजाज़त के उस पर कोई मुकदमा नहीं चला सकता
और आज तक किसी भी मामले में सरकार नें सिपाहियों पर मुकदमा चलाने के लिए कोई इजाज़त नहीं दी है
आपको आपत्ति है कि हम आपकी सेना को बलात्कारी क्यों कहते हैं ?
हम ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि जब कोई सिपाही महिला के साथ बलात्कार करता है
तो उस सिपाही को बचाने के लिए सरकार मुकदमा लड़ती है
आखिर सरकार बलात्कारी सिपाही को क्यों बचाना चाहती है ?
क्योंकि बलात्कार पीड़ित या तो आदिवासी हैं या दलित या अल्पसंख्यक और मजदूर ,
और बलात्कारी को सिपाही को बचाने वाली सरकार चलाने वाले हैं अमीर सवर्ण बहुसंख्यक सम्प्रदाय के लोग ,
इसलिए भारत में साम्प्रदायिकता ,जातिवाद और आर्थिक गैरबराबरी के रहते ,
हमारी सेनाएं कभी भी जनता की सेना नहीं बन सकतीं .
ये सेनाएं हमेशा जातिवादी , साम्प्रदायिक और अमीरों की गुलाम बनी रहेंगी .
हम सिपाहियों के खिलाफ़ नहीं हैं .
असल में आपके सिपाही वैसे ही बन जायेंगे जैसा आप उन्हें आदेश देंगे .
समस्या सिपाही नहीं उन्हें आदेश देने वाले और उनका समर्थन करने वाले आप हैं .
हमारी लड़ाई आप से है .
आप साम्प्रदायिकता ,जातिवाद और आर्थिक शोषण बंद कीजिये
हमारी सेनाएं अच्छी बन जायेंगी
इसलिए हम जहां एक तरफ सिपाहियों की क्रूरता के खिलाफ़ लड़ते हैं
वहीं दूसरी तरफ हम साम्प्रदायिकता ,जातिवाद के खिलाफ़ और औरतों , आदिवासियों और मजदूरों के लिए लड़ते हैं
आप हमें देशद्रोही कम्युनिस्ट ,नक्सलवादी , पाकिस्तानी एजेंट कहते हैं
क्योंकि एक दिन हम आपको आपके ऊंचे स्थान से उतार कर सबके बराबर खड़ा कर देंगे
तब एक आदिवासी और अम्बानी बराबर होंगे
और हिंदू, मुसलमानों से श्रेष्ठ नहीं माने जायेंगे
फिर सिपाही भी अम्बानी और अदिवासी के साथ एक जैसा व्यवहार करेगा

आपके भक्तों का गैंग देश के टुकड़े होने से नहीं रोक पायेगा


पहले भी हम लोग हिन्दु मुस्लिम एकता का काम करते थे
तब इसे राष्ट्रीय एकता का काम माना जाता था
सरकार को इस काम से कोई आपत्ति नहीं होती थी
सांसद या मंत्री भी ऐसे कार्यक्रमों में बिना किसी हिचक के भाग लेते थे
हम लोग इस काम को बिल्कुल सुरक्षित काम मानते थे
इस काम में ना पुलिस के कान खड़े होते थे , ना सरकार को कोई चिन्ता होती थी
अलबता मजदूरों के अधिकारों के लिये काम करने वाले साथी कभी कभी लाठी खाते थे और बीच बीच में कुछ साथी जेल भी हो आते थे ၊
लेकिन फिर भाजपा सरकार सत्ता में आ गयी
भाजपा सरकार को सत्ता में बैठाने में मुज़फ्फर नगर दंगों नें महत्वपूर्ण रोल अदा किया
सारे देश में लव जिहाद का शोर मचा कर मुसलमानों को वहशी कामुक और हिन्दु लड़कियों के लिये खतरे के रूप में बदनाम किया गया
नरेन्द्र मोदी मुसलमानों को मारने वाले हिन्दु हीरो के रूप में उभरा और राष्ट्र का उद्वारकर्ता बन कर भारत का प्रधानमंत्री बना
जापान जाकर वहाँ के राजा को गीता भेंट करते समय मोदी ने कहा कि मेरे गीता भेंट करने से भारत में शोर मचेगा लेकिन मेरे सेक्युलर दोस्तों की दुकान भी चलती रहनी चाहिये
ये किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्त पर पहला हमला था
घर्मनिरपेक्षता भारत के संविधान का एक प्रमुख आधार है
भारत के प्रधानमंत्री का पद एक संवैधानिक पद है
संवैधानिक पद पर बैठ कर कोई व्यक्ति संविधान का मज़ाक नहीं उड़ा सकता
हम सब नें चुपचाप यह नज़ारा देखा
लेकिन इस तरह धर्मनिरपेक्षता का माखौल उड़ा कर मोदी नें अपनी नफरती सेना को एक सन्देश दिया
कि अब सरकार की दिशा क्या होगी
पुलिस को भी लाइन समझ में आ गई
कि अब हिन्दु मुस्लिम एकता की बात करने वाले सरकार विरोधी लोग हैं
आज हिन्दु मुसलमान बराबर हैं कहने वालों को विदेशी एजेंट, नक्सली , कम्युनिस्ट , आपिये , दल्ले कहा जा रहा है
गाली देने वाले नफरती भक्तों के कहने से पुलिस डन्डे मार रही है
सत्ता के लिये हिन्दुओं को भड़काकर वोट लेने का जो रास्ता भाजपा ने चुना है वह बहुत खतरनाक जगह पहुंचा देगा
क्योंकि यह देश तभी तक एक है जब तक हम सभी समुदायों को बराबर इज्ज़त , अधिकार और मौके देते हैं
लेकिन अगर आप मुसलमानों को डरायेंगे , उनसे नफरत करेंगे , उन्हें मकान किराये पर नहीं देंगे , उन्हे कटुआ , और पाकिस्तानी कहेंगे
या हिन्दु मुस्लिम एकता का काम करने वालों को आप कम्युनिस्ट , लाल बंदर , चीन के एजेंट कह कर उन पर खुद और पुलिस से हमला करवायेंगे
तो मुझे डरते हुए ये कहना पड़ रहा है
ये देश फिर से टूट जायेगा
आपकी सेना या पुलिस
या आपके भक्तों का गैंग देश के टुकड़े होने से नहीं रोक पायेगा

मेहरबानी कर के मेरे जिले के मुसलमानों को बदनाम मत कीजिये

अभी अभी युवा पत्रकार कृष्णकांत की लिखी पोस्ट पढ रहा था
उन्होने बहुत सीधे ढंग से कैराना के बारे में भाजपा नेता हुकुम सिंह के झूठ की पोल खोली है
उस पोस्ट पर भक्तों का झुंड उन्हें गालियां दे रहा है
भक्त गण युवा पत्रकार को चुनौती दे रहे हैं कि तुझ में दम है तो जा कैराना में अपनी बीबी और बच्चों के साथ रह कर देख
भक्तों की जानकारी के लिये बता दूँ कि मैं मुज़फ्फर नगर का ही रहने वाला हूँ
मेरे ताऊ पं ब्रहम प्रकाश शर्मा प्रसिद्ध स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे , देश भर के नेता घर पर आते थे
भारत छोड़ों आंदोलन में मेरे पिताजी नें मुजफ्फर नगर रेलवे स्टेशन को आग लगा दी थी, और फरार हो गये थे
बाद मैं गांधी जी से उनका पत्र व्यवहार हुआ और गांधी जी नें मेरे पिताजी को सेवा ग्राम बुला लिया था
मैं जवानी में छत्तीसगढ़ चला गया था और वहाँ आदिवासियों के बीच रहा
मुज़फ्फरनगर में हमारा घर मुसलमानों के बीच में ही था ,
हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच मूँह बोले रिश्ते हुआ करते थे ၊
रशीद ताऊजी, गनी चाचा, जो दशहरे और ईद पर हम बच्चों को एक एक रुपया दिया करते थे
वे लोग आज भी मेरी स्मृति में है
मुज़फ्फर नगर दंगों के बाद हम पीड़ितों के बीच काम करने गये
हमें आफिस के लिये एक बड़ा मकान चाहिये था
एक मुस्लिम वकील साहब की बड़ी कोठी खाली थी
वकील साहब उसे बीस हजार महीने पर देने के लिये तैयार हो गये
कुछ दिनों बाद वकील साहब यूँ ही टहलते हुए मिले
उन्हें जब पता चला कि मैं मुजफ्फर नगर का ही हूं तो उन्होंने मेरे परिवार का परिचय पूछा
वकील साहब नें मेरे परिवार का परिचय सुनते ही मुझे गले से लगा लिया
इसके बाद हम लोग वहाँ छ्ह महीना रहे
वकील साहब नें हम से कोठी का किराया नहीं लिया
उन्होंनें कहा कि आपके ताऊ पंडित ब्रह्म प्रकाश जी हमारे बड़े भाई जैसे हैं
हम अपने भतीजे से किराया लेंगे क्या ?
वकील साहब अक्सर अपने घर से खाना भी भिजवा देते थे
और कहते थे पंडत जी शाकाहारी है चिन्ता मत करियो
खैर आइये अब कैराना चलते हैं
आप कैराना जायेंगे तो कस्बे के बाहर खेतों में आपको झोपाड़ियाँ फैली हुई मिलेंगी
ये मुज़फ्फर नगर दंगों के समय के विस्थापित शरणार्थी है
असली विस्थापित ये हैं
इन भारतीयों को पाकिस्तानियो ने विस्थापित नहीं किया है
इन भारतीयों को भारतीयों नें ही विस्थापित किया है
कभी ये विस्थापित अपने घरों में खुशी से रह रहे थे
इनके घर जला दिये गये
इनके परिवार की महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया
इनके परिवार के सदस्यों को मार डाला गया
ये सब गरीब मुसलमान लोग हैं
इनकी चर्चा कोई नहीं करता
हिन्दुओं की तरफ से इतनी नफरत झेलने के बावजूद इन विस्थापितों के मन में हिन्दुओं के लिये कोई कड़वाहट नहीं है
आप इनके बीच जाइये ये आपके लिये तुरंत चाय बना कर लायेंगे
अगर आप चाय नहीं पियेंगे तो ये समझ जायेंगे कि आप इनके मुसलमान होने के कारण इनके हाथ से बनी चाय नहीं पी रहे हैं
ये तुरंत किसी को भेज कर दुकान से कोल्ड ड्रिंक की बोतल ले आयेंगे
हुकुम सिंह का घर भी कैराना में है
पूछिये उससे कि इतने दंगे करवाने के बाद भी किसी मुसलमान ने हुकुम सिंह से कोई बेअदबी भी करी क्या ?
मैं किसी भी हिन्दु को आमंत्रण देता हूँ
कैराना समेत मुजफ्फर नगर के किसी भी मुस्लिम गांव में चले जाइये
साथ में अपने परिवार को लेकर जाइये
अगर आप वहाँ से भूखे लौट कर आ जायें तो मैं शर्त हार जाऊंगा
मेहरबानी कर के मेरे जिले के मुसलमानों को बदनाम मत कीजिये

राष्ट्रीय एकता के लिये इतने सारे मुसलमानों का इकट्ठा होना मीडिया के लिये कोई खबर ही नहीं



इस साल फरवरी में मुस्लिम संगठनों नें मुज़फ्फर नगर के बुढ़ाना कस्बे में दो दिन का सम्मेलन रखा था
विषय था साम्प्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता
मुझे भी इस सम्मेलन में बोलने के लिये बुलाया गया था
दिल्ली से ओम थानवी और मुंबई से राम पुनियानी भी आये थे
प्रसिद्ध संत प्रमोद कृष्णम जी भी थे
भाजपा सांसद हुकुम सिंह भी आमंत्रित थे
दुनिया भर से मुस्लिम विद्वान भी आये थे
मैनें अपने सम्बोधन में कहा कि मुसलमानों को भारत की राजनीति समझनी चाहिये
हमें समझना चाहिये कि ये दंगा भड़काने वाले कौन लोग हैं ?
और यह समझना चाहिये कि दंगों का मकसद क्या है ?
और दंगे कैसे भड़काये जाते हैं ?
आयोजक पीछे से मेरा कुर्ता खींचने लगे कि आप सियासत पर मत बोलिये
बस हिन्दु मुस्लिम एकता पर बोलिये
मैनें कहा दंगों की राजनीति समझे बिना हम दंगे नहीं रोक पायेंगे
मैनें कहा कि क्या दंगे लोगों के हिन्दु मुसलमान होने की वजह से हुए थे ?
या अमित शाह नें पूरी योजना बना कर दंगे करवाये थे ?
हुकुम सिंह सिर झुकाये सुनते रहे
आयोजक लगातार मुझे टोका टाकी करते रहे
मैनें कहा कि अगर आयोजक चाहते हैं कि मैं मीठा मीठा गैर राजनैतिक भाषण दूँ तो वह नहीं होगा
मैनें कहा मैं भाषण बन्द कर के जा रहा हूँ
भारी तादात में श्रोता चिल्लाने लगे कि हिमांशु कुमार को बोलने दो
हिमांशु कुमार बिल्कुल ठीक कह रहे हैं हम इन्हें सुनना चाहते हैं
मैं वहाँ से आ गया
मेरे वहाँ से निकलने के बाद प्रमोद कृष्णम जी नें मुझे टोकने का विरोध किया
इस सम्मेलन में करीब तीन लाख मुसलमान आये थे
साम्प्रदायिक सद्‌भाव और राष्ट्रीय एकता के लिये इतने सारे मुसलमानों का इकट्ठा होना मीडिया के लिये कोई खबर ही नहीं थी
इसके बरक्स हरियाणा में सद्भावना सम्मेलन की खूब खबरें छापी गई जिसमें बाबा रामदेव नें लाखों लोगों की गरदने काटने की धमकी दी थी
आज हुकुम सिंह दुनिया भर में मुसलमानों को ऐसे बदनाम कर रहे हैं जैसे कि साम्प्रदायिक माहौल मुसलमानों नें खराब किया हो
दंगे हुकुम सिंह की पार्टी ने करवाये
दंगे भड़काने में हुकुम सिंह आगे आगे रहे
अब सारा ठीकरा मुसलमानों के मत्थे फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

आप इन मुसलमानों के साथ करना क्या चाहते हैं ?


संघियों , भाजपाइयों , बजरंगियों , शिवसैनिकों , विहिप के दोस्तों
आप लगातार लिखते हो , बोलते हो चिल्लाते हो
कि मुसलमान खराब हैं , इनके कुरान में फलां बात लिखी है , ये फलां देश में ऐसा कर रहे हैं , वगैराह वगैराह
थोड़ी देर को मान लेते हैं कि आपकी बात सही है
तो बताइये आप इन मुसलमानों के साथ करना क्या चाहते हैं ?
यही सवाल आपसे गांधी नें पूछा था कि आखिर आप चाहते क्या हैं ?
तो आपने जवाब में गांधी को गोली मार दी
सच में बताइये आप दिन रात यह मुसलमानों इसाइयों के खिलाफ बातें करते हैं तो उसका उद्देश्य क्या है ?
क्या आप मुसलमानों और इसाईयों के साथ नहीं रहना चाहते ?
क्या आप साथ रहते हुए इसाइयों और मुसलमानों के साथ हमेशा लड़ते हुए इस देश में रहना चाहते हैं ?
क्या आप इसाईयों और मुसलमानों को भारत से निकाल देना चाहते हैं ?
क्या आप सिर्फ हिन्दुओं के लिये अलग देश बनाना चाहते हैं ?
क्या आप सारे मुसलमानों और इसाइयों को मार डालना चाहते हो ?
बताइये तो सही
आखिर आप चाहते क्या हैं ?

भले उसके मुंह पर एसिड मल दो


दुनियां की सबसे खूबसूरत महिला है सोनी सोरी भले उसके मुंह पर एसिड मल दो या यौनांगों में पत्थर ठूंस दो चरित्र राज्य का सौ गुना कुरुप होगा सोनी का नहीं
सोनी की बढती लोकप्रियता और सधे कदम शैतानी स्टेट के लिए दहशत हैं वे मार सकते हैं निहत्थी सोनी को पर ये कायराना हरकत सोनी को हमारी रोजा लग्जमबर्ग हमारी जोन डी आर्क बना देंगे !
याद रहे क्रूर तानाशाह बटिस्टा ने सैकड़ो क्यूबन देशभक्तों के अंडकोष निकाल लियो थे तो महान क्यूबन मुक्तियोद्धा फिदेल कास्त्रो ने कहा था____
"तुमने जिनके अंडकोष निकाल लिये हैं आज उनकी मर्दानगी से क्यूबा मुक्त होकर जगमगा रहा है वे असली मर्द हैं !"
सलाम सोनी तुम्हारे जज़्बे को तुम्हारे जज्बात को तुम्हारे शौर्य को और तुम्हारे प्रदीप्त सौंदर्य को जो लाख खुर्शीद सरेबाम रहने के बाद भी सबसे रौशन हुआ जाता है !
लव यू सोनी
हम तुम्हारे साथ हैं
इस वक्त की तुम नायिका हो
देश की आईकन हो !
Yuva Deep Pathak की वाल से

रश्‍मि


रश्‍मि द्विवेदी एक संपन्न परिवार में पैदा हुई ၊ पिता प्रसिद्ध वैद्य थे ၊ रश्मि की शादी एक संपन्न परिवार में तय हो गई थी ၊ रश्मि को पता चला कि शादी में बड़ा दहेज़ दिया जाने वाला है ၊ विरोध में रश्‍मि नें घर छोड़ दिया और आदिवासियों के बीच एक गांव में रहने लगी ၊ कुछ वर्षों बाद प्रसिद्ध युवा सामाजिक कार्यकर्ता रत्नेश्वर नाथ और रश्मि नें शादी करी ၊ रश्मि और रत्नेश्वर नाथ की एक बेटी हुई ၊ रत्नेश्वर कांकेर के के पास आदिवासियों के साथ उनके अधिकारों के लिये और रश्मि बिलासपुर के पास बैगा आदिवासियों के साथ काम करने लगी ၊ रश्‍मि की बेटी लगभग सात साल की थी, एक दिन सड़क पार करते समय दुर्घटना में बच्ची का देहांत हो गया ၊ कुछ वर्षों बाद रत्नेश्वर नाथ का भी निधन हो गया ၊
रश्मि आदिवासियों के बीच काम करती रही ၊ जब मैं बस्तर में काम करता था तो अक्सर हम मिलते थे ၊ बस्तर में सरकार ने आदिवासियों के जिन गांवों को जला दिया था , हम लोग उन गांवों में दोबारा आदिवासियों को बसा रहे थे ၊ रश्मि युवा कार्यकर्ताओं को लेकर दोबारा बसाये गये गांवों का अध्ययन करने लाई थीं ၊
रश्मि बहुत हिम्मती थी ၊ एक बार बैगा आदिवासियों के सरकारी दमन के खिलाफ हज़ारों आदिवासियों के साथ मुख्यमंत्री रमन सिंह का बंगला सुबह चार बजे घेर लिया था ၊ पुलिस , प्रशासन और सरकार के हाथ पैर फूल गये थे ၊
रश्‍मि उम्र में मुझ से छोटी थी ၊ मैनें साथियों से पूछा कि रश्मि को अचानक क्या हुआ था ၊ पता चला रश्‍मि को कैंसर हो गया था ၊ पैसों का अभाव रहता था ၊ लेकिन रश्मि एक दिन की भी छुट्टी किये बिना आदिवासियों के लिये भाग दौड़ करती रही ၊ फिर एक दिन खबर आयी कि रश्मि नहीं रही ၊ बात बात में ठहाके लगाने वाली , पुलिस की लाठियों के बीच हुंकार लगाने वाली वह साहसी साथी हमारे बीच से उठ कर चली गई है ၊ विश्वास करने में समय लगेगा ၊
सरकार कहती है आदिवासियों के अधिकारों के लिये लड़ने वालों को विदेशी पैसा मिलता है , ये लोग ऐश करते हैं ၊
रश्‍मि और उन जैसे अनेकों कार्यकर्ता गुमनाम रह कर भारत के लोकतन्त्र को दूर देहातों तक ले जाने का महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं ၊ वर्ना लोकतन्त्र किसी किताब में लिखी कहानी बन कर रह जायेगी ၊
अलविदा साथी रश्मि ၊

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ हिन्दुओं का ज़्यादा बड़ा दुश्मन है


राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ क्या सिर्फ मुसलमानों का दुश्मन है ?
नहीं यह हिन्दुओं का ज़्यादा बड़ा दुश्मन है ?
यह हिन्दुओं का क्या क्या नुकसान कर सकता है ?
सबसे पहले तो यह हिदुओं के बच्चों को बेवकूफ बना देगा
हिन्दू बच्चे गणेश और हनुमान जैसे काल्पनिक कैरेक्टरों और सूंड जोड़ने और
सूरज को निगलने जैसी कहानियों को सच मानने लगेंगे
ऐसे बेवकूफी भरे दिमाग के बच्चे कभी भी मौलिक रिसर्च नहीं कर पायेंगे
भारत की राजनीति हमेशा के लिए मूर्खता के इलाके में प्रवेश कर जायेगी
राजनीति को आदमी और औरतों की बराबरी के लिए काम करना चाहिए
लेकिन भाजपाई नेता औरतों को बच्चा पैदा करने की मशीन बनाने की घोषणाएं कर रहे हैं
भाजपाई नेता कह रहे हैं कि औरतों को जेल में बंद करवा के उनसे चार बच्चे पैदा करवाए जायेंगे
कभी कह रहे हैं हिन्दू मर्द पोर्न देखों और ज्यादा बच्चे पैदा करो
एक नेता कह रहा है मर्दानगी बढ़ाने वाली दवाई मैं देता हूँ ले जाओ और ज़यादा बच्चे पैदा करो
इन सारे बयानों से हमारी यह पुरानी आशंका पूरी तरह सच सिद्ध हो गयी है
कि संघ औरतों के बारे में अपमान जनक विचार रखता है
और संघ औरतों को बराबर का नागरिक कभी भी नहीं मानेगा
इसीलिये प्रधानमंत्री मोदी भी औरतों की बराबरी का मतलब साथ में सेल्फी तक ही सीमित रखता है
यानी अगर औरत के साथ में एक मर्द होना ही चाहिए जो उसके साथ सेल्फी ले सके
संघ की राजनीति अगर सफल हो जाती है तो दूसरा नुकसान यह होगा कि हमारे बच्चे देशवासियों से ही नफरत करने वाले बन जायेंगे
आज जो नौजवान संघ से जुड़े हुए हैं या मोदी भक्त हैं उनकी हालत देख लीजिये
ये लोग मुसलमानों को गालियाँ देते हैं ईसाईयों को गालियाँ देते हैं , दलितों से नफरत करते हैं औरतों की आजादी का विरोध करते हैं
आज ऐसे वख्त में जब कि दुनिया की राजनीति सभी की बराबरी की कोशिशें कर रही है
वहीं भारत की राजनीति मुस्लिम मुक्त भारत बनाने और औरतों को जेलों में बंद करवा के बच्चे पैदा करवाने वाले युग में जा रही है
भारत की बहुसंख्य हिन्दू आबादी को सोचना पडेगा कि हम अपने बच्चों को किन जाहिलों के हाथों में सौंपना चाहते हैं
इसलिए अच्छे से समझ लीजिये संघ मुसलमानों का नुकसान कम करेगा हिन्दुओं का ज्यादा करेगा
ये आपके बच्चों को नफरती चिंटू बना देगा जो ना समाज का दुश्मन होगा वरना अपना भी दुश्मन होगा
क्योंकि ऐसी नफरत से भरे बच्चे जीवन के सौन्दर्य को कभी नहीं समझ पाएंगे

मुठभेड़ हुई थी तो हड्डियाँ कैसे टूट गयीं ?


पुलिस ने आदिवासी लड़की का अपहरण किया , उसके साथ बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी थी
कल उस लड़की की लाश का पोस्ट मार्टम किया गया
पोस्ट मार्टम छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश पर किया गया
डाक्टरों ने उसके पूरे शरीर का एक्सरे किया
क्योंकि परिवार वालों का कहना था कि हड्डियां टूटी हुई थी
सवाल यह है कि अगर लड़की नक्सली थी और सचमुच में उसके साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई थी
तो हड्डियाँ कैसे टूट गयीं ?
अगर शरीर पर गोलियों के निशान हैं तो वर्दी पर गोलियों के निशान क्यों नहीं हैं
लड़की की गर्दन कटी हुई थी
मुठभेड़ में गर्दन कैसे कट गयी ?
बहुत सारे सवाल हैं जो पुलिस की कहानी को आविश्वसनीय बनाते हैं
उधर पुलिस असली मामले पर से ध्यान भटकाने के लिये नई चालाकी कर रही है
पुलिस कह रही है कि मारी गई लड़की के माता पिता जो अदालत में पेश हुए है वो नकली हैं
पुलिस नें मारी गई लड़की के वकील को नोटिस दिया है और कहा है कि कागजात पेश करो कि लड़की के मां पिता असली माता पिता हैं
यानी अगर आदिवासी के पास कोई सरकारी कागज ना हो तो वह अपनी मारी गई बेटी को अपनी बेटी नहीं कह सकते
पुलिस दावा कर रही है कि इस लड़की के असली माता पिता तो नक्सलवादी हैं
पुलिस बेकार की मेहनत कर रही है
क्योंकि अगर थोड़ी देर के लिये पुलिस की बात सच भी मान ली जाय कि मारी गई लड़की के मां बाप नक्सलवादी हैं
तो भी पुलिस को यह हक नहीं है कि वह उनकी बेटी के साथ बलात्कार करे
कल पुलिस ने लड़की के माता पिता के वकीलों की गाड़ी को रोका और दो घन्टा थाने में बैठा कर रखा
पुलिस इस मामले से जुड़े लोगों के दिमाग पर दहशत डालना चाह रही है
पोस्ट मार्टम के लिये गये पुलिस बल के एक अधिकारी मुदराज नें मारी गई लड़की के गांव के परिवार और गांव के आदिवासियों को घमकी दी है कि तुम लोगों नें हमारे खिलाफ कोर्ट में शिकायत करने की हिम्मत करी है इसलिये जब हम लाश वापिस करने गांव में आयेंगे तो तुम लोगों का पहले से भी बुरा अंजाम करेंगे
लड़ाई आदिवासियों की हिम्मत और सरकार की क्रूरता के बीच है
इन लड़ाइयों की विशेषता यह है कि भले ही इन लड़ाइयों में क्रूर सत्ता जीत जायें
लेकिन इतिहास मारे गये लोगों को विजेता घोषित करता है
हूल विद्रोह या जलियांवाला में भले ही अंग्रेज और जनरल डायर थोड़ी देर के लिये जीते हुए दिखाई दिये
लेकिन इतिहास ने विजेता हत्यारों को कूड़ेदान में फेंक दिया
और मार डाले गये लोगों को अमर विजेता घोषित कर दिया
आदिवासियों का महान संग्राम जिन्दाबाद
जालिम सरकार मुर्दाबाद

दंगा कराने की क्लासेज


अकबर, बाबर का पोता था
तुलसीदास, अकबर के समय में हुए थे
तुलसीदास के रामचरितमानस लिखने के बाद अयोध्या में राम के मंदिर बनने शुरू हुए
रामचरितमानस लिखे जाने के पहले अयोध्या में राम का कोई मंदिर नहीं था
लेकिन संघी फैलाते हैं की बाबर ने राम का मंदिर तोड़ दिया था
अरे जो मंदिर पोते के समय में बना वह दादा ने कैसे तोड़ दिया था ?
यह बिल्कुल वैसा ही तर्क है जो आजकल भक्त फैला रहे हैं
असालियत में NSG की स्थापना 1974 में हुई
नेहरु की मृत्यु 1964 में हुई
तो भक्तों के मुताबिक तो नेहरू ने अपनी मृत्यु के 10 साल बाद बने NSG ग्रुप की सदस्यता 10 साल पहले ही ठुकरा दी थी ?
इसी तरह से संघियों ने टीपू सुल्तान के बारे में झूठा प्रचार किया था
टीपू सुल्तान की मृत्यु 1799 में हुई
और कैमरे का आविष्कार 1840 में हुआ
लेकिन भक्तों ने किसी व्यक्ति की फोटो टीपू सुल्तान की फोटो कहकर फैलाने शुरू की थी
जब 1799 में कैमरा ही नहीं बना था तो टीपू सुल्तान की फोटो कहां से आ गई ?
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में अफवाह फैलाने
और दंगा कराने की क्लासेज लगती है

झगड़ा


झगड़ा किन के बीच है
दो वर्ग हैं
एक जो बहुत मेहनत करता है
लेकिन तकलीफ में जिंदगी गुजारता है
दूसरा वह वर्ग है जो कड़ी मेहनत नहीं करता 
लेकिन मज़े में जिंदगी गुजारता है
मेहनत किये बिना जो वर्ग मज़े में है
वह गालियाँ देने में बिजी है
इसे हम आरामखोर वर्ग कहेंगे
यह आरामखोर वर्ग मजदूरों को गालियाँ देता है
यह आरामखोर वर्ग मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाले लोगों को अपने लिए खतरा समझता है
इसलिए यह आरामखोर वर्ग मजदूरों के लिए काम करने वाले लोगों को चीन का एजेंट , नक्सलवादी , आपिया , कहता है
ध्यान से देखिये सारा विकास का गुब्बारा इसी आरामखोर वर्ग के लिए फुलाया जा रहा है
शापिंग माल , महंगी कारें , महंगे मकान , चाकलेट, सौंदर्य प्रसाधन , गजेट्स जैसी बे ज़रूरत की चीज़ों का उत्पादन इसी वर्ग के लिए किया जा रहा है
इसी आरामखोर वर्ग के एशो आराम के लिए दुनिया के नए देशों पर हमले किये जा रहे हैं
सारी मार काट हिंसा इसी वर्ग के लालच और ऐश के लिए करी जा रही है
इसी आरामखोर वर्ग के लिए पृकृति का ज़्यादा से ज़्यादा दोहन किया जा रहा है
इसी आरामखोर वर्ग की वजह से पर्यावरण का नाश हो रहा है
इसी आरामखोर वर्ग के लिए संसाधनों की लूट चल रही है
इसी आरामखोर वर्ग के लिए आदिवासियों की हत्याएं करी जा रही हैं
इसी आरामखोर वर्ग के एशो आराम के लिए आदिवासियों की महिलाओं से बलात्कार किये जा रहे हैं
इसी आरामखोर के एशो आराम के लिए किसान आत्महत्या कर रहे हैं
यही आरामखोर वर्ग अम्बानी अदाणी जिंदल का भक्त है
यही आरामखोर वर्ग अपने किये जाने वाले पाप और हीन भावना से मुक्ति पाने के लिए
खोखले धरम और फर्ज़ी संस्कृति का फटा हुआ ढोल पीटते रहते हैं
यही आरामखोर वर्ग ही साम्प्रदायिकता की राजनीति का समर्थक है
क्योंकि अगर साम्प्रदायिकता की राजनीति नहीं होगी
तो फिर न्याय अन्याय आर्थिक लूट के मुद्दे की राजनीति शुरू हो जाने का अंदेशा है
और अगर न्याय अन्याय और आर्थिक लूट के मुद्दे उठ गए
तो आरामखोर वर्ग की आरामखोरी मिटा कर न्याय युक्त समाज बनाया जा सकता है
इसलिए आरामखोर वर्ग कभी भी इस देश की राजनीति को आर्थिक न्याय के मुद्दे पर नहीं आने देगा
यह आरामखोर वर्ग हमेशा पाकिस्तान , मुसलमान , गाय , भारत माता को ही राजनीतिक मुद्दे बनाता रहेगा
यह आरामखोर वर्ग कभी भी आदिवासियों , किसानों , अल्पसंख्यकों औरतों छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनने देगा
यह अरामखोर वर्ग इन वर्गों के लिए आवाज़ उठाने वालों को हमेशा देशद्रोही घोषित करके पुलिस के मार्फ़त जेल, लाठी और गोली से दबाता रहेगा
यही वह वर्ग है जो इस देश को कभी भी हिंसा अत्याचार और अन्याय से मुक्त नहीं होने देगा
भारतीय राजनीति के इस वर्गीय चरित्र को ठीक से समझे बिना इस वर्ग के चंगुल से राजनीति को मुक्त नहीं किया जा सकता

रूबी राय


बिहार की रूबी राय को इस लिये जेल में डाल दिया गया है
क्योंकि उसे वह सब नहीं आता जो किताबों में उसने पढ़ा
और परीक्षा में जिसके कारण वह पास हुई
इस हिसाब से सारे जजों , वकीलों , पुलिस वालों ,नेताओं और अफसरों को जेल में डाल देना चाहिये
किताबों में जातिवाद को गैरकानूनी बताया गया है
किताबों में साम्प्रदायिकता की मनाही है
लेकिन उसे खुले आम व्यवहार में लाया जा रहा है
भारत के कानूनों में राजद्रोह का कानून अंग्रेजी राज को बनाये रखने के लिये था
कक्षा आठ की किताब में लिखा है कि यह कानून अंग्रेजी राज की मनमानी का सबूत है
लेकिन किताब की बात कौन मानता है
इसी कानून के तहत डाक्टर बिनायक सेन को उम्र कैद सुना दी गई
जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया को इसी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया
क्या पुलिस कमिश्नर को आठवी की किताब का सबक याद नहीं था ?
क्या मोदी को आठवी की किताब याद नहीं थी ?
क्या कन्हैया पर हमला करने वाले वकीलों नें आठवी कक्षा की किताब नहीं पढ़ी थी ?
किताब में पढ़े सबक याद ना रखना अगर गुनाह है
तो इन सभी वकीलों , जजों , पुलिस वालों और मोदी को जेल में डालो
उस अकेली बच्ची को क्यों सता रहे हो ?


गोबर खिलाया


अभी एक खबर दिखाई दी
कि गाय लेकर जाने वाले दो व्यापारी युवकों को पकड़ कर मारा पीटा गया और उन्हें गोबर खिलाया गया
दोनों युवक पानी के साथ गोबर निगल रहे थे और उल्टियां करते जाते थे
पढते पढते मेरा मन खराब हो गया
हम इतने क्रूर कैसे हो सकते हैं ?
उस पोस्ट पर नीचे कुछ हिंदू वीरों के कमेन्ट भी थे
एक साहब लिखते हैं कि अगर सऊदी अरब में कोई सुअर की तस्करी करता तो उसके साथ क्या किया जाता ?
यानी वह भाई कह रहे हैं
कि अगर हम क्रूर हैं तो क्या हुआ ?
अरबी लोग भी तो क्रूर हैं
यानी अरबी लोग क्रूर हैं इसलिए हम भी क्रूर बन सकते हैं
यानी दुनिया में अगर कहीं भी बुराई है तो हम भी उतने बुरे बन जायेंगे
सऊदी अरब की सरकार की क्रूरता उनका नुकसान करेगी
हमारी क्रूरता हमारा नुकसान करेगी
कुछ दिन पहले मैं युवाओं के एक प्रशिक्षण में शामिल था
जाति कुव्यवस्था पर एक फिल्म ‘इण्डिया अनटच्ड’ दिखाई गयी
फिल्म के बाद एक लड़की नें कहा कि गुजरात में दलित भी आपस में भेद भाव करते हैं
और जाटव भी बाल्मीकी के साथ छुआछूत मानते हैं
मैंने कहा कि जाटव और बाल्मीकी के बीच की छुआछूत उनकी समस्या है
जिसे उन्हें खुद दूर करना है
आपके दिमाग में घुसा हुआ जातिवाद आपकी अपनी समस्या है
आप अपनी समस्या दूर करिये
उनकी समस्या वह खुद दूर करेंगे
आप यह नहीं कह सकते कि जब तक जाटव और बाल्मीकि अपना जातिवाद दूर नहीं करंगे तब तक मैं जातिवादी बनी रहूंगी
हम खुद की बुराइयों को जारी रखने के लिए क्या क्या बेकार के तर्क देते हैं ?
इसी तरह पुलिस और सरकार की क्रूरता पर चर्चा शुरू करते ही लोग नक्सलियों की क्रूरता की चर्चा करने लगते हैं
वे बहुत चालाकी के साथ सरकार और पुलिस की क्रूरता के बारे में चर्चा बंद करना चाहते हैं
पुलिस और सरकार की क्रूरता असल में हमारी अपनी क्रूरता है
हम सरकार को वोट देते हैं
और पुलिस हमारे टैक्स के पैसे से तनख्वाह से काम करती है
हमारे पैसे से चलने वाली पुलिस अगर बलात्कार करती है
तो जिम्मेदारी हमारी बनती है
कि हम उस क्रूरता का विरोध करें
लेकिन लोग उस क्रूरता पर बात करने से बचने के लिए हमेशा चालाकी करने लगते हैं
अभी हाल ही में मडकम हिड़मे के साथ पुलिस वालों नें बलात्कार करके उसकी योनी में चाकू डाल कर नाभी तक चीर दिया था
हम दिल्ली की दामिनी कांड में उस लड़की के साथ हुई क्रूरता पर मोमबत्तियाँ जलाते हैं
और जब हमारे पुलिस वाले बस्तर में आदिवासी लड़की के साथ वैसी ही क्रूरता करते हैं
तो हम उस पर चर्चा करने से बचना चाहते हैं
तब हम जान बूझ कर नक्सलियों की चर्चा शुरू कर देते हैं
हमारी क्रूरता हमारे लिए नुकसान दायक है
नक्सली अगर क्रूर हैं तो वो खुद उसका नुकसान उठाएंगे
आप यह नहीं कह सकते कि हम असल में इसलिए क्रूरता करते हैं क्योंकि नक्सली क्रूरता करते हैं
अपनी गलती को दूसरे की गलती की आड़ में छिपाना बंद कीजिये
खुद को धोखा देना बंद कीजिये

मां बाप होने का सबूत


पुलिस वाले इस मां के सामने उसकी जवान बेटी को घर से खींच कर ले गये
बेटी से बलात्कार करने के बाद पुलिस नें बेटी को मार दिया
मां अदालत में फरियाद करने पहुंची
पुलिस मां से कहती है सबूत ला कि तू मारी गई लड़की की मां है
उस गांव के सभी आदिवासियों के राशन कार्ड सरकार ने कई साल पहले ज़ब्त कर लिये थे
क्योंकि सरकार चाहती थी कि गांव वाले गांव छोड़ कर भाग जायें
हिड़मे की मां कहती है आस पास के किसी भी गांव के आदिवासी के पास सरकार ने कोई कागज़ नही छोड़ा
अब सरकार हमारे बच्चों को मार रही है
और हमसे हमारे मां बाप होने का सबूत मांग रही है
हम कहाँ से सबूत लायें ?


माल्या

शराब व्यापारी माल्या भाजपा का सांसद था 
उसने बैंकों से नौ हज़ार करोड़ रूपये का कर्ज लिया हुआ था
उसके ऊपर कोर्ट में केस चल रहे थे
सबको पता था यह विदेश भाग सकता है
लेकिन मोदी सरकार नें उसे रोकने के लिए पुलिस में कोई रिपोर्ट नहीं लिखवाई 
जब माल्या भाग गया तब सरकार नें कोर्ट को बताया कि माल्या तो विदेश भाग गया
भारत के बैंकों का लगभग दस लाख करोड़ रुपया इसी तरह के अमीरों की कंपनियों नें खा लिया है
रिजर्व बैंक के गवर्नर नें बैंकों से कहा कि इन कंपनियों की संपत्ति पर कब्ज़ा करके अपना कर्जा वसूल करो
संघ के एक नेता नें बताया कि रिजर्व बैंक के इस आदेश से अमीर उद्योगपतियों में खलबली मच गयी
इसके बाद भारत के प्रधान मंत्री कार्यालय नें सरकार के एक सुझाव दिया कि रिजर्व बैंक चार लाख करोड़ रुपया घाटे में चल रहे बैंकों को दे दे
यानी अब बैंक अमीरों की कंपनियों से अपना कर्जा वापिस ना लें और उनकी संपत्ति पर भी कब्ज़ा ना करें
क्योंकि रिजर्व बैंक उन्हें चार लाख करोड़ रुपया दे देगा
इससे अमीरों की कंपनियां तो बच जायेंगी
लेकिन रिजर्व बैंक कमज़ोर हो जाएगा
लेकिन भारत के पुराने सस्थानों को नष्ट करने का मोदी सरकार का यह कोई पहला मामला नहीं है
मोदी सरकार जब से आयी है तब से वह भारत की पुरानी संस्थाओं को नष्ट कर रही है
सबसे पहले मोदी सरकार नें योजना आयोग को नष्ट किया
इसके बाद पंचायत विभाग को बंद करने की कगार पर ले आयी है
अब मोदी सरकार अमीर उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाने के लिए रिजर्व बैंक को लूटने की योजना बना रही है
एक तरफ मोदी सरकार बूढ़े यात्रियों को ट्रेन के किराये में मिलने वाली छूट खतम करने में लगी हुई हैं
वहीं वह देश के जनता के खजाने को अमीरों की तिजोरी में पहुंचा रही है
जनता को भारत माता की जय की नारेबाज़ी में फंसा दिया गया है
और चुपचाप खजाने पर हाथ साफ़ किया जा रहा है
मोदी सरकार अब तक की सबसे बड़ी घोटाले बाज़ सरकार है
और आप यह मत कहियेगा कि मोदी खुद भ्रष्ट नहीं है
वह खुद भी भारत का सबसे बड़ा भ्रष्ट नेता है
आप मोदी की गूगल पर कोई भी तस्वीर देख लीजिए
उसमें किन्हीं भी दो कार्यक्रमों में मोदी नें एक जोड़ा कपड़ा दुबारा नहीं पहना
मोदी दिन में लगभग पांच बार सूट बदलता है
मोदी के एक सूट की औसत की मत दो लाख रूपये है
मोदी के एक दिन के कपड़ों की कीमत दस लाख रूपये है
यानी तीन करोड़ रूपये महीना सिर्फ कपड़ों का खर्चा
ऐसा खर्चीला आदमी इमानदारी कर ही नहीं सकता
ऐसा खर्चीला आदमी कभी भ्रष्ट और देश को लूटने वाले उद्योगपतियों पर कार्यवाही कर ही नहीं सकता
ऐसा भ्रष्ट प्रधान मंत्री देश के खजाने को लूटने में सहयोग देगा ही
ईमानदारी सादगी में से निकलती है
ये प्रधान मंत्री देश को लूट रहा है
मोदी भारत को परमानेंट नुकसान पंहुचा कर जाएगा
ये भारत का खजाना भी लूटेगा
सत्ता के लिए भारत के भाईचारे को नष्ट करेगा
अमीरों के लिए आदिवासियों को मारेगा और महिलाओं से बलात्कार करवाएगा
मोदी भारत का बुरा वख्त है
वायर मेगेज़ीन में प्रकाशित नीचे लिखी रिपोर्ट इन बातों का और भी खुलासा करती है

मोदी भक्त


ऐसा नहीं है कि मोदी भक्त बेवकूफ है
और भक्त अपनी मूर्खता के कारण मोदी की हर गलती का समर्थन करते हैं
नहीं भक्त बहुत मेहनत से तैयार किये जाते हैं
भक्त बनाने की एक लम्बी प्रक्रिया होती है
भक्त बनाने का एक पूरा राजनीति शास्त्र होता है
भक्त बनाने के पीछे राजनीतिक फायदे का पूरा गणित होता है
हिटलर ने भी भक्त बनाये थे
जब हिटलर नें एक करोड़ दस लाख लोगों की हत्या की तब
उसके भक्त हिटलर की जयजयकार कर रहे थे
हिटलर ने अपने भक्तों के दिमाग में बैठा दिया था
कि यहूदी हमारी नौकरी खा रहे हैं
हमारी सारी समस्या की जड़ यहूदी है
यहूतियों को मार डालेंगे तो हम सुखी हो जायेंगे
इसके बाद हिटलर ने बूढ़ो औरतों बच्चों समेत एक करोड़ से ज़्यादा लोगों को मारा
जिसमें साठ लाख यहूदी और पचास लाख दूसरे लोग भी थे
आइये अब भारत की बात करते हैं
भारत में संघ नें आज़ादी के पहले से ही मुसलमानों , इसाइयों और दलितो के विरुद्ध नफरत फैलाने का अभियान शुरू कर दिया था
बड़ी जातियां जो भारत में हमेशा से पैसा और सत्ता वान थीं
वे संघ की जन्मदाता थीं
इनका उद्देश्य यह था कि
भारत की आज़ादी के बाद भी पैसे और सत्ता पर हमारा ही कब्ज़ा रहना चाहिये
पिछली चार पीढ़ियों से भक्त तैयार करने का काम अब इस मुकाम पर पहुंच गया
कि इन लोगों ने भारत की सत्ता पर कब्ज़ा करने में सफलता पा ली है
भक्त दो भावनाओं से भरा हुआ रहता है .
मुसलमानों के प्रति नफरत
और मुसलमानों से डर
और मुसलमानों के प्रति नफरत और डर की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति का माध्यम होता है मुसलमानों के खिलाफ दंगा
दंगा ही इस डर और नफरत की आक्सीजन है
लंबे समय तक दंगा ना हो तो भक्त के दिमाग से
मुसलमानों के प्रति डर और नफरत दोनों खत्म हो जायेगी
इसलिये संघ बीच बीच में दंगा करते रहता है
मोदी जैसा बनावटी करिश्माई नेता इसलिये तैयार किया जाता है
ताकि लोगों को नेता की भक्ति के नशे में डाल कर
देश की अर्थव्यवस्था और शासन पर कब्ज़ा किया जाय
और जब देश को लूटा जाय तो नशे में डूबे हुए लोग कोई आपत्ति ना करें
नफरत और डर में डूबे हुए भक्त मोदी को सिर्फ इसलिये भगवान मानते है
क्योंकि मोदी नें दो हज़ार मुसलमानों को मारा
और मुसलमानों को यह दिखा दिया कि हिन्दु डरने वाली कौम नहीं है
भक्त मानते हैं कि मुगलों के शासन में अपना आत्म सम्मान खो चुकी हिन्दु अस्मिता मोदी ने वापिस दिला दी
भक्त यह भी मानते हैं कि अब अगर मोदी किसी भी मुद्दे पर नीचा देखते हैं
तो उसका अर्थ होगा
कि हमारे शाश्वत दुश्मन मुसलमान जीत जायेंगे
मुसलमानों से हार जाने का काल्पनिक भय ही
भक्तों को मोदी की हर गलत बात का समर्थन करने के लिये मजबूर करता है
साम्प्रदायिकता की राजनीति का यही दोष है
इसमें जनता अपना भला बुरा नहीं सोच पाती
साम्प्रदायिकता के नशे में डाल कर जनता का खूब शोषण किया जा सकता है
इसलिये हम आम जनता को और युवाओं को
साम्प्रदायिकता की राजनीति के चंगुल से निकालने के लिये काम करते हैं