Saturday, July 30, 2016

देश की कुल मेरिट

अमेरिका में गोरों को मेरिट वाला माना जाता था
लेकिन जब रंगभेद विरोधी आंदोलन के बाद अफ्रीकी मूल के अमरीकी आबादी को भी अपनी काबालियत दिखाने का मौका मिला
तो अमेरिका के खेल जगत और संगीत समेत अनेकों क्षेत्रों में अफ्रीकी मूल के अमरीकी नागरिकों ने अमेरिका को दुनिया में नम्बर एक पर पहुँचा दिया
इसी तरह भारत में शूद्र और दलित मान कर बहुत बड़ी आबादी को अपनी मेरिट दिखाने से वंचित कर दिया गया
आजादी के समय इन समुदायों को भी अपनी योग्यता दिखाने का अवसर दिया गया
शूद्र और दलित बता कर जिनसे हज़ारों साल तक अवसर छीन लिये गये थे
उन्हें पढ़ने और नौकरियों में आने के अवसर दिये गये
ऐसा करने से भारत की मेरिट की संख्या बढ़ गयी
जो सवर्ण चिल्लाते हैं कि ये दलित और शूद्र बे मेरिट वाले हैं
और मेरिट वाले सवर्णों के साथ अन्याय कर रहे हैं
उन्हें समझना चाहिये कि मेरिट सब के पास हमेशा से थी
सिर्फ उसे दिखाने का मौका अब दिया गया है
इससे देश की कुल मेरिट बढ़ गयी है

सबसे अच्छा मज़हब

बेशक आतंकवाद का संबंध किसी धर्म से नहीं है
लेकिन अगर आप मानते हैं कि आप का धर्म दुनिया का सबसे बेहतरीन धर्म है
तो आप बेध्यानी में अपने बच्चों के दिमाग में यह भी डाल रहे हैं
कि आपके मज़हब के अलावा बाकी मज़हब बेकार और गलत हैं
यहीं से दूसरों के वास्ते नफरत, हिकारत और गुस्सा पैदा होता है
इसी नफरत से यज़ीद और गोडसे पैदा होते हैं
आप जिस दिन इस हकीकत को कबूल कर लेंगे .
कि आपका हिन्दु या मुसलमान होना महज़ एक संयोग है
आपका जन्म दूसरे मज़हब में भी हो सकता था
अपने मज़हब का दीवाना मत बनिए
वर्ना बहुत जल्द आप खुद को नफरत के नारे लगाने वाली भीड़ का हिस्सा बना हुआ पायेंगे
आपका मज़हब दुनिया का
सबसे अच्छा मज़हब नहीं है

कडेनार

छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले में कडेनार गाँव है
इस गाँव में पांडे नाम की एक लड़की रहती थी
पांडे के गाँव पर सरकारी सुरक्षा बलों का हमला होता रहता था
सरकारी सुरक्षा बल आदिवासी लड़कियों से बलात्कार , निर्दोष आदिवासियों की हत्या करना ,आदिवासियों को बाज़ारों से पकड़ कर जेलों में डाल देना करते रहते थे ,
गांव में आकर सरकारी सुरक्षा बल आदिवासियों की खेती और अनाज के कोठार भी जला देते थे,
नक्सली भी उसे इलाके में आ गए थे
नक्सली लोग आदिवासी युवक युवतियों को सरकार से लड़ने के लिए अपने संगठन में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे
पांडे भी नक्सलियों के साथ जंगलों में चली गयी
पांडे नक्सलियों के साथ एक साल रही
इसी दौरान पांडे को मनोज नामक एक आदिवासी लड़के से प्यार हो गया
दोनों नें नक्सली गतिविधियां छोड़ कर शादी करके गाँव में रहने का फैसला किया
पांडे अपने घर की बड़ी संतान थी
पांडे के अलावा पांडे का एक छोटा भाई था
पांडे के परिवार नें मनोज के परिवार से आग्रह किया कि मनोज को अपने ससुराल की खेती बाड़ी संभालने दें और पांडे के गाँव में ही बसने की इजाज़त दे दें
मनोज अपनी पत्नी पांडे के ही घर में रहने लगा,
२० मई २०१६ को शाम को सात बजे के करीब मनोज और पांडे की मां घर के आंगन में बैठ कर खाना खा रहे थे
तभी सुरक्षा बलों का एक टोला घर में घुस आया
उन्होंने मनोज को पकड़ लिया
कुछ सिपाही घर के भीतर घुस गए और घर के भीतर से पांडे को पकड़ के बाहर ले आये
सिपाहियों नें गमछे से मनोज और पांडे के हाथ उनके पीछे बाँध दिए
पांडे की माँ नें पूछा इन्हें कहाँ ले जा रहे हो ?
सिपाहियों नें कहा कुछ पूछताछ करने के बाद कल छोड़ देंगे
थाने आकर दोनों को ले जाना
गाँव वालों नें गाँव के बाहर पांडे की चीखें सुनी
अगले दिन किसी नें पांडे की माँ से कहा तेरी बेटी और दामाद की लाश बीजापुर में पड़ी है जा ले आ
पांडे की माँ गाँव के लोगों को लेकर बीजापुर से अपनी बेटी और दामाद की लाश लेकर आये और उनका अंतिम संस्कार कर दिया
गाँव वालों का कहना है कि सुरक्षा बलों नें पांडे के साथ बलात्कार किया था
गाँव वालों नें पांडे की चीखें सुनी थी .
पुलिस ने पांडे और मनोज की लाश की तस्वीरें भी प्रकशित करी
गाँव वालों का कहना है कि पांडे को जब घर से पकड़ कर ले गए थे तब उसने साड़ी पहनी हुई थी
लेकिन पुलिस नें मीडिया में जो तस्वीर बांटी उसमें पांडे को नक्सली वर्दी पहने हुए दिखाया है
पुलिस नें हमेशा की तरह अपने पास से भरमार बंदूकें इनकी लाश के पास रख कर फोटो खींच लीं
इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि पांडे की पैंट की बेल्ट खुली हुई है
कोई नक्सली कभी भी पैंट की बेल्ट खोल कर मुठभेड़ करने नहीं आयेगी
पांडे की कमीज़ का बटन भी खुला हुआ है
पांडे की वर्दी पर गोलियों के सुराख नहीं हैं
इसी तरह अगर मनोज के शरीर पर उसकी टांगों पर पिटाई के निशान हैं
जो इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि इन्हें पकड़ कर पहले मारा गया है और बाद में इनकी हत्या करी गयी है
गाँव वालों का कहना है कि पांडे के गुप्तांगों के आस पास चाक़ू के निशान थे
गाँव से पांडे की माँ और मनोज के पिता तथा गांव के अन्य लोग सोनी सोरी के पास आये
सोनी सोरी और लिंगा कोडोपी के साथ पांडे और मनोज के परिवार वालों नें एक पत्रकार वार्ता दंतेवाड़ा में करी है
मारे गए पति पत्नी के परिवार वाले इस मामले को अदालत में ले जाना चाहते हैं

सोनी सोरी

आज सोनी सोरी फोन पर बात करते करते रो पड़ी ၊
सोनी का कहना था कि आज मुझे पुलिस थाने में फिर से यौन प्रतारणा झेलनी पड़ी
छत्तीसगढ़ के भैरमगढ़ थाने में पुरुष पुलिस अधिकारियों नें सोनी सोरी के पर्स में से मासिक धर्म में इस्तेमाल किये जाने वाले पैड निकाल लिये
पुलिस अधिकारियों नें सोनी सोरी को अभद्र भाषा में धमकाया
सोनी सोरी आज आदिवासियों की रैली में भाग लेने बीजापुर जा रही थीं
आदिवासी आज बीजापुर जिला मुख्यालय में एक पति पत्नी की पुलिस द्वारा हत्या का विरोध करने के लिये रैली करने की कोशिश कर रहे थे
सरकार नहीं चाहती थी कि सोनी सोरी आदिवासियों की रैली का नेतृत्व करे
एक तरफ आज सरकार ने रैली में आ रहे आदिवासियों पर हमले किये
साथ ही साथ सरकार ने आदिवासियों की नेता सोनी सोरी को रोकने के लिये उनका अपमान किया
एक तरफ तो छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार नक्सलवाद का रोना रोती है
और लोकतन्त्र की दुहाई देती है
वहीं दूसरी तरफ लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने वाली आदिवासी महिला नेताओं पर यौन हमला करती है
हम छत्तीसगढ़ सरकार की घिनौनी हरकतों को देश के लिये खतरा मानते हैं

साम्प्रदायिकता का मुख्य काम

साम्प्रदायिकता का मुख्य काम अपने ही सम्प्रदाय के लोगों की आवाज़ को दबाना होता है
हिन्दु साम्प्रदायिकता का मुख्य काम क्या है ?
दलितों की बराबरी की मांग को कुचलना
आदिवासियों की ज़मीनों पर कब्ज़ा करना
भारत में औरतों की बराबरी की मांग से ध्यान हटाना
भारत में मज़दूरों की बदतर हालत से ध्यान हटाना
किसानों की समस्या से ध्यान हटाना
विद्यार्थियों की मांग सस्ती शिक्षा और रोजगार से ध्यान भटकाना
इसी तरह मुस्लिम साम्प्रदायिकता का क्या काम है ?
अपने ही सम्प्रदाय में औरतों द्वारा बराबरी की मांग को दबाना
अपने सम्प्रदाय के नौजवानों द्वारा तर्क और शिक्षा की तरफ जाने और सवाल उठाने को दबाना
अपने ही सम्प्रदाय में शिक्षा और रोज़गार की मांग से लोगों का ध्यान भटकाना
आप ध्यान से देखिये
दोनो ही सम्प्रदाय के साम्प्रदायिक नेता औरतों की बराबरी के विरोधी , गरीब विरोधी , मज़दूर विरोधी , तर्क विरोधी और शिक्षा विरोधी होते है
ध्यान से देखिये जब भी इनके अपने सम्प्रदाय के भीतर लोग बराबरी की मांग उठाते हैं , तभी ये साम्प्रदायिक नेता सक्रिय हो जाते हैं
तुरंत साम्प्रदायिक नेता अपने सम्प्रदायों को ज़्यादा कट्टर धार्मिक बनाने के काम में लग जाते हैं
और उसी समय यह साम्प्रदायिक नेता अपने अनुयायियों को दूसरे सम्प्रदायों का भय दिखाते हैं
इन साम्प्रदायिक नेताओं की चालाकी पकड़ना कोई मुश्किल काम थोड़े ही है
थोड़ी आंखे खुली रखिये
आप भी सारा तमाशा खुद साफ साफ देख सकते हैं

जाकिर नाइक

अगर आपको लगता है कि ज़ाकिर नाइक के भाषण सुन कर कोई आतंकवादी हरकत करता है
तो आतंकवादी हरकत करने वाले पर कार्यवाही कीजिये
जाकिर नायक पर कार्यवाही की मांग मत कीजिये
क्योंकि अगर आप ऐसी मांग करेंगे तो अपने तर्क में खुद ही फंस जायेंगे
जैसे सरकार लम्बे समय से कोशिश कर रही है कि
आदिवासियों के लिये आवाज़ उठाना जुर्म घोषित कर दे
और आवाज़ उठाने वाले को जेलों में डाल दे
सरकार वहाँ भी यही तर्क लगाती है
सरकार कहती है कि आदिवासियों के लिये नक्सलवादी लड़ रहे हैं
और यह मानवाधिकार वाले भी आदिवासियों के लिये आवाज़ उठाते हैं
इससे यह सिद्ध होता है
कि मानवाधिकार कार्यकर्ता और नक्सलवादी एक ही विचारधारा के हैं
और चूंकी नक्सलवादी हिंसक संघर्ष में यकीन करते हैं
इसलिये मानवाधिका कार्यकर्ताओं को भी जेल में डाल देना चाहिये
सरकार यह भी कहती है कि यह सामाजिक कार्यकर्ता नक्सलियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं
इसलिये इन सामाजिक कार्यकर्ताओं को सज़ा दी जाय
और इस तर्क के आधार पर बहुत सारे कार्यकर्ताओं को पुलिस जेल में डाल भी देती है
सोनी सोरी , बिनायक सेन , प्रशांत राही , सीमा आज़ाद और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को पुलिस ने जेलों में डाला भी है
लेकिन भारत का सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में कई बार संविधान की मंशा स्पष्ट कर चुका है
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि विचारधारा को अपराध घोषित नहीं किया जा सकता
इसलिये अगर किसी की विचारधारा नक्सली, आतंकी , पृथकतावादी, अराजकता वादी या कोई और भी क्यों ना हो
उसे सज़ा नहीं दी जा सकती
सज़ा सिर्फ आपके द्वारा करी गई गतिविधि के लिये दी जा सकती है
सिर्फ उन्हीं गतिविधियों के लिये सज़ा दी जा सकती है
जिन्हें भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी में अपराध माना गया हो
मेरे बारे में छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दर्खवास्त दी कि हिमांशु कुमार नक्सलियों के प्रति सहानुभूति रखता है
इसलिये कोर्ट हिमांशु कुमार की बात ना सुने
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि किसी के प्रति सहानुभूति रखना कोई अपराध नहीं है
हिमांशु कुमार जो कोर्ट में मामला लाये हैं उस पर जवाब दीजिये
उसके अलावा कोई किताब रखना , कोई भाषण देना , किसी संगठन का सदस्य होना , किसी के प्रति सहानुभूति रखना अपराध नहीं माना जायेगा
क्योंकि अगर आप ऐसा कर देते हैं
तो कल को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ कहेगा कि जो हमारी विचारधारा को नहीं मानेगा उसे जेल में डाल दिया जायेगा
क्योंकि संघ की विचारधारा राष्ट्रवादी है इसलिये संघ के अलावा बाकी विचारधारायें राष्ट्रद्रोही हैं
तब आप अपने ही तर्क में फंस जायेंगे
इसलिये सिर्फ भाषण देने के लिये जाकिर नाइक पर कार्यवाही करने का समर्थन मत कीजिये
वर्ना कल को किसी के भी भाषण देने पर सरकार पाबंदी लगा सकती है
भाषण का जवाब भाषण से दीजिये
अगर जाकिर नाइक गलत बात कह रहा है तो आप एक सही भाषण दीजिये
सरकार की ताकत का भीड़ द्वारा दुरुपयोग करने की कोशिश का हिस्सा मत बनिये
यह रास्ता आगे जाकर आप की गरदन तक पहुंचता है

इन्कलाब जिंदाबाद

आपकी देशभक्ति हमारे सिपाहियों के मरने पर उफनती है
आप फेसबुक पर लाईक , शेयर , कमेंट करके अपनी देशभक्ति दिखाते हैं
और अगर कोई सवाल उठाये कि आइये सिपाहियों के मरने के मूल कारणों को हल करने की कोशिश करें
तो आप उसे गालियां बकने लगते हैं
जैसे अगर कोई कहे कि कश्मीर समस्या का हल सोचना चाहिये
तो आप उसे गाली देते हैं
या अगर बस्तर में सिपाहियों के मरने पर कोई कहे कि
हमें नक्सल समस्या पर चर्चा करनी चाहिये
तो भी आप गाली देने लगते हैं
इसी तरह पूर्वोत्तर की समस्या को समझने के सुझाव पर भी आप खफा हो जाते हैं
आप कहते हैं
हमारे वीर सिपाही कश्मीर , छत्तीसगढ़ या मणिपुर में देशद्रोहियों को मार देंगे
फिर सब ठीक हो जायेगा
असल में आपको सिपाहियों से कोई प्रेम नहीं है
आपको सिपाहियों के मरने से कोई फर्क ही नहीं पड़ता
सिपाही बेचारा गरीब का बच्चा है और बन्दूकधारी मज़दूर है
सिपाही असल में आपके लालच के लिये मारा जा रहा है
आपको कश्मीर की ज़मीन चाहिये
कश्मीरी नहीं चाहिये
आपको छत्तीसगढ़ के खनिज चाहिये
छत्तीसगढ़ के आदिवासी नहीं चाहियें
आपको पूर्वोत्तर के राज्यों से बिजली चाहिये
वहाँ के लोगों को आप चिंकी के सम्बोधन के अलावा ज़्यादा इज्ज़त देने के लिये तैयार नहीं हैं
आप कभी छत्तीसगढ़ , कश्मीर या मणिपुर की बलात्कार पीड़ित लड़कियों को इस देश की नागरिक मानने को भी तैयार नहीं हुए
असल में आपकी देशभक्ति फर्ज़ी है
आपको बस लूट में हिस्सा चाहिये
ताकि आपकी कार , ऐश , शापिंग मॉल वाली जिंदगी चलती रहे
आप को ना देश से कोई मतलब है
ना यहाँ के नागरिकों की आपको कोई चिंता है
ना आपको सिपाहियों के मरने की चिंता है
आपका व्यवहार साम्राज्यवादी व्यवहार कहलाता है
जैसे अंग्रेजों को भारत तो चाहिये था
लेकिन भारतीयों से उन्हें कोई प्यार नहीं था
इसी लिये भगत सिंह का नारा था
साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
भगत सिंह का नारा आपके ही खिलाफ था
भगत सिंह जानते थे यह दिन आयेगा
इसे बदलने के लिये ही भगत सिंह नें नारा दिया था
इंकलाब जिंदाबाद
ध्यान रखियेगा आपके लालच, लूट और चालाकी के रहते देश में शांति , और सद्भाव आ ही नहीं सकता
हम इस लूट की पोल खोलेंगे
हम देशप्रेम को यहाँ के लोगों से प्रेम करने की शर्त में बदल देंगे
हम कभी नहीं थकेंगे
इन्कलाब जिंदाबाद
साम्राज्यवाद मुर्दाबाद

धर्म गुरु

पेट चीर कर
बच्चा निकाले जाने से पहले
और
अपने जिस्म में पत्थर ठूंसे जाने से पहले
और 
अपना घर आग के हवाले
होने से पहले
ये लोग आखिर प्रार्थना में क्या कहते होंगे ?
धर्म ग्रंथों के मुताबिक़ बताइये
कि आखिर इनकी प्रार्थना में कौन सा उच्चारण दोष रह जाता है
जिसके कारण
इनकी प्रार्थना
अनसुनी रह जाती हैं
मैं धर्म गुरु का पेशा ही अपना लूँगा
और सिखाऊँगा
इन नामुरादों को प्रार्थना का सही तरीका
लेकिन मुझे कोई बताए तो सही
कि ईश्वर किसकी सुनता है और किसकी अनसुनी कर देता है ?
- हिमांशु कुमार

सबसे क्रूर सभ्यता

भारतीय सभ्यता दुनिया की सबसे क्रूर सभ्यता है
मैं अपनी बात सिद्ध करने के लिये यह नहीं कहूँगा कि भारतीय लोग एक तपस्वी शंबूक की हत्या करने वाले को अपना आदर्श मानते हैं
और उस का मन्दिर बनाने के लिये और भी हत्यायें करने को धर्म और पवित्र कर्तव्य मानते हैं
मैं आज की क्रूरताओं की चर्चा करूँगा
दो दिन पहले मध्य प्रदेश के तीस गांवों के निवासियों को बेघर कर दिया गया
क्योंकि मोदी को रिश्वत देने वाले उद्योगपति अदाणी के पावर प्लांट के लिये बांध में पानी भरना था ၊
घर छोड़ने से इंकार करने वाले एक मुसलिम परिवार की बेटियां घर में अकेली थी
उनके पिता को हवालात में डाल दिया गया
देश में किसी को बुरा नहीं लगा
चार दिन पहले उड़ीसा में सीआरपीएफ नें छह आदिवासियों को गोली से उड़ा दिया है
इनमें से दो महिलायें हैं
और एक दो साल का आदिवासी बच्चा भी है
जिस देश के सशस्त्र सैन्य बल देश के ही दो साल के बच्चे को गोली से उड़ा दें
और देश इसे चर्चा करने लायक घटना भी ना माने
उस देश को आप दयालु और महान संस्कृति का वाहक विश्वगुरू कह सकते हैं क्या ?

लखापाल

लखापाल एक आदिवासी गांव है
यह गांव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में है
परसों यानी 8 जुलाई को सुबह सुबह सुरक्षा बलों नें गांव पर धावा बोला
सुरक्षा बलों ने आदिवासियों के घरों में घुस कर घरों में रखा हुआ पैसा लूट लिया
तेलाम जोगा बकरे बेचने का धन्धा करता है उसके घर में 6O हजार रुपये थे
सभी आदिवासियों के घरों से कुल मिला कर एक लाख चालीस हजार रुपये सुरक्षा बलों द्वारा लूटे गये
इसके बाद सुरक्षा बल छ्ह आदिवासियों को पकड़ कर ले गये
पकड़ कर ले जाये गये आदिवासियों में सरकारी
आश्रमशाला में पांचवी कक्षा में पढ़ने वाला 14 वर्ष का जोगा भी शामिल है
जबकि पकड़ कर ले जाये गये एक दूसरे बुजुर्ग आदिवासी सोना की उम्र 7O वर्ष है
पुलिस ने सभी आदिवासियों को जेल में डाल दिया है
पुलिस ने आदिवासियों के पास से एक लाख रुपये नगद होने का केस बनाया है
यहां भी पुलिस चालीस हजार रुपया खुद खा गई
पुलिस ने जो मामला बनाया है उनमें इन आदिवासियों के पास से एके 47 के दो खाली कारतूस और गन पाउडर, साहित्य, पत्र और पटाखे बरामद बताया है
यह सभी सामान पुलिस के पास हमेशा उपलब्ध रहता है
पुलिस के झूठ की पोल इस बात से खुलती है कि अगर पुलिस को इतनी बड़ी सफलता सचमुच मिली थी तो मीडिया को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई
पीड़ित परिवारों द्वारा एक पत्रकार से संपर्क करने पर फोन द्वारा मिली जानकारी के आधार पर छोटी सी खबर अन्दरूनी पन्ने पर छपी है
आदिवासियों को भयभीत करके उनकी जमीनों पर कब्ज़ा करने और तरक्की के लालच में निर्दोष आदिवासियों को फंसाने का काम छत्तीसगढ़ में जोर शोर से चल रहा है
हम इस मामले में पीड़ित आदिवासियों की मदद करने के लिये अपने वकील दोस्तों से संपर्क कर रहे हैं ၊

तिरंगा या भगवा

भारत का संविधान कहता है कि भारत धर्म निरपेक्ष होगा
यानी यहाँ सभी धर्मों को बराबर माना जाएगा
और सरकार किसी एक धर्म को आश्रय नहीं देगी
हिंदुओं के हितों की बात करने वाले संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नें
आज़ादी मिलते ही राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगे को स्वीकार करने से मन कर दिया था
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नें तिरंगे को जलाया था
छत्तीसगढ़ में भाजपा का शासन है
भाजपा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को अपना पितृ संगठन मानती है
इसलिए अब छत्तीसगढ़ में हिंदू राष्ट्र के सभी प्रतीकों को सरकारी तौर पर लादा जा रहा है
अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों की मीटिंग को राज्यपाल की जगह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों नें संबोधित किया
छत्तीसगढ़ के अनेकों गाँव के बाहर बोर्ड लगा दिए गए हैं कि इस गाँव में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है
अभी एबीवीपी के स्थापना कार्यक्रम का उदघाटन कमिश्नर नें किया और उनका ध्वज भी फहराया
इस चित्र में आप देख सकते हैं कि शासकीय पालिटेक्निक पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की जगह भगवा ध्वज फह्राजा जा रहा है
एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार राष्ट्रवाद के नाम पर आदिवासी महिलाओं से बलात्कार करवा रही है
इसके विरुद्ध आवाज़ उठाने वालों को राष्ट्रद्रोही कह कर सरकार जेलों में डाल रही है
दूसरी तरफ हिंदू राष्ट्रवाद के एजेंडे को लागू करती जा रही है
ये हिंदू राष्ट्रवाद आदिवासियों , महिलाओं ,दलितों , मुसलमानों ईसाईयों के लिए नर्क से बढ़ कर होगा
लिखवा कर ले लो

रायगढ़

छत्तीसगढ़ का एक जिला है रायगढ़ 
ज़मीन के नीचे कोयला बहुत है 
रायगढ़ जिले में एक उद्योगपति नवीन जिंदल हैं 
जिंदल मुफ्त में कोयला लेता है 
सरकार को मंहगी बिजली बेचता है 
लाखों लोगों की जिंदगी बर्बाद कर चुका है
कांग्रेस और भाजपा दोनों जिंदल की जेब में हैं
नवीन जिंदल के खिलाफ डेढ़ सौ वारंट हैं
लेकिन पुलिस उनका कुछ नहीं करती
असल में रायगढ़ के सभी थानों की बिल्डिंग जिंदल साहब के दान से बनी है
रायगढ़ जिले में पुलिस की जीपें भी जिंदल साहब ने पुलिस विभाग को दान में दी हैं
तो हमारे देश की पुलिस और सरकार इतनी अहसान फरामोश भी नहीं है
कि जिंदल साहब को ही पकड़ ले
जिंदल साहब को अगर कोई किसान ज़मीन देने से मना करे तो जिंदल साहब खुले आम उसका मर्डर करवा देते हैं
पिछले दिनों मेनें एक महिला की आपबीती आप लोगों के साथ साझा करी थी
उस महिला ने बताया कि जिंदल के लिये ज़मीन देने से मना करने पर उसके भाई की हत्या कर दी गई
उसके बाद उस महिला को ले जाकर सामूहिक बलात्कार किया गया था
जिंदल साहब के गुण्डों ने सामाजिक कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल को गोली मार दी थी
रमेश अग्रवाल साहब अभी भी हिम्मत के साथ जिंदल के जुल्मों के खिलाफ लड़ रहे हैं
लेकिन कोयला लूट में जिंदल के अलावा भी कंपनियां शामिल हैं
कल एक शानदार घटना घटी
हज़ारो महिलायें गांवों से निकल कर सड़क पर आ गई
ज़ोरदार पानी बरस रहा था
सड़क पर भी पानी भर गया
महिलायें सारी रात पूरा दिन बारिश में सड़क पर खड़ी रहीं
उन्होंने कोयले के सारे ट्रक रोक दिये
सरकारी अफसर महिलाओं को धमकाने आये
अफसरों नें कहा ऐसा करने से देश का नुकसान होगा
महिलाओं नें जवाब दिया हम ही तो देश हैं
लड़ेगा इंडिया तभी तो बचेगा इंडिया

अमरनाथ यात्रा

आज ट्रेन में यात्रियों से चर्चा हुई
ये यात्री अमरनाथ यात्रा से लौट रहे थे
मैनें पूछा कैसी रही आपकी यात्रा ?
बोले अरे वो सब कश्मीरी आतंकवादियों की वजह से गड़बड़ हो गई
मैने पूछा अच्छा क्या कश्मीरी आतंकवादियों नें अमरनाथ पर हमला किया
यात्री बोले नहीं अमरनाथ पर हमला तो नहीं किया
मैनें पूछा तो क्या कश्मीरी आतंकवादियों ने तीर्थयात्रियों पर हमला किया
वे एक दूसरे का मूँह देखने लगे , फिर धीरे से बोले कि नहीं कश्मीरी आतंकवादियों नें तीर्थयात्रियों पर कोई हमला नहीं किया
मैनें पूछा कि फिर कश्मीरी आंतकवादियों की वजह से आपकी यात्रा कैसे बर्बाद हो गई ?
तीर्थ यात्री बोले कि आर्मी वालों नें ऐसा बोला था
यानी अमरनाथ यात्रा किसी कश्मीरी के कारण नहीं रूकी है
सेना और सरकार ने मिल कर कश्मीरियों को बदनाम करने के लिये बेवजह अमरनाथ यात्रा बन्द करी है
दूसरी खबर यह है कि अमरनाथ यात्रा बन्द करके यात्रियों को जबरदस्ती वापिस भेजा जा रहा है
कल वापिस आते समय तीर्थयात्रियों की एक बस पलट गई
तीर्थयात्री दूसरी गाड़ियों से मदद मांगते रहे
लेकिन दूसरे तीर्थयात्रियों ने मदद के लिये अपनी गाड़ी नहीं रोकी
सेना का ट्रक भी नहीं रुका
फिर किसी मुस्लिम कश्मीरी गांव वाले ने यह सब देखा
फिर तो कश्मीरी मुसलमानों का पूरा गांव
हिन्दु अमरनाथ यात्रियों को बचाने के लिये दौड़ पड़ा
बस के काँच तोड़ कर बस में फंसे यात्रियों को निकाला गया
फिर सभी घायल तीर्थ यात्रियों को कश्मीरी गांव वालों ने अस्पताल पहुंचाया
दूसरी खबर यह है कि दंगे में फंस कर एक पंडित परिवार भूखा था
एक कश्मीरी पति पत्नी ने कर्फ्यू की परवाह करे बिना अपने कन्धे पर खाने का सामान लादा
और कई मील पैदल चल कर पंडित परिवार तक खाना पहुँचाई
सुना है कश्मीर में गोलियों के छर्रे लगने से एक सौ के करीब कश्मीरियों की आंख खराब हो गई है
इधर भारत वासियों की आंखें बिना गोली लगे ही बन्द हो गई हैं
हमें सच्चाई दिखनी ही बन्द हो गई है
या हम जान बूझ कर यह सब देखना नहीं चाहते ?

चरखे पर हाथ से काता हुआ सूत


बड़ौदा मां पिताजी के पास आया हूँ ,
पिताजी नें कहा चलो अहमदाबाद साबरमती गांधी आश्रम जाना है
वहाँ अपने चरखे पर हाथ से काता हुआ सूत देकर आना है
गांधी आश्रम से खादी संस्था के एक मित्र इस सूत का कपड़ा जुलाहे से बुनवा कर दे देंगे
पिताजी और मैं अपने हाथ से काते सूत की ही खादी पहनते हैं
हम बाजार से कपड़ा नहीं खरीदते
कपास की कीमत में कपड़ा बन जाता है
अगर कोई दिन में आधा घन्टा चरखा चलाता है
तो साल भर पहनने का कपड़ा मुफ्त में पड़ता है
गांधी का कहना था कि जब हम बिना उत्पादन किये उपभोग करेंगे
तो हम गुलाम हो जायेंगे
आज हम बड़ी कंपनियों के गुलाम बन चुके हैं
साबुन , कागज , तेल , चप्पल , कपड़ा , गांव में नहीं बनाया जा सकता था क्या ?
आज फावड़ा तक टाटा बनाता है
अपनी गुलामी हम खुद लाये हैं
इसमें से निकलने का रास्ता भी खुद को ही खोजना होगा
कोई अवतार नहीं आयेगा

लड़ाई

हिन्दु की लड़ाई मुसलमानों से है
जिस गांव में मुसलमान नहीं हैं वहां हिन्दुओं की लड़ाई दलितों से है
इसाई कैथोलिक कि लड़ाई प्रोटेस्टेंट से है
सुन्नी मुसलमान की लड़ाई शिया, अहमदिया से है
सूडान , अफ्रीकी देशों में कबीलों में लड़ाई है
जहाँ धर्म की लड़ाई नहीं है
वहां फुटबाल की टीमों के समर्थकों के बीच खूनी लड़ाई है
असल में गड़बड़ आपके अपने भीतर है
खुद को दूसरों से श्रेष्ठ और ऊँचा दिखाने का घमण्ड
आपके दिमाग में घुसा हुआ है
इसालिये आप को एक दुश्मन चाहिये
जिससे आप खुद को बेहतर ,श्रेष्ठ , ऊँचा और सही साबित कर सकें
आपकी इस बीमारी की वजह से दुनिया में खून खराबा है
युद्ध हिंसा दुख तबाही सब आपका पैदा किया हुआ है
जब आप अपने बच्चों को सिखाते हैं
दूसरों को पीछे कर के आगे निकलो
तो आप यही सिखा रहे होते है कि तुम्हारे आस पास के
लोग तुम्हारे साथी नही बल्कि दुश्मन हैं
खुद ही समझिये आपने अपने जीवन को खुद ही कितना हिंसक और दुखी बना लिया है

अपने देश का हिस्सा

हरियाणा में तीन बलात्कार के आरोपियों को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया
उन आरोपियों ने जेल से बाहर आकर पीड़ित लड़की के साथ फिर से सामूहिक बलात्कार किया
इन अपराधियों को शायद पकड़ लिया जायेगा
पूरे देश में कोई भी इन बलात्कारियों के पकड़े जाने और इन्हें जेल में डालने का विरोध नहीं करेगा
मैं भी आपको बिल्कुल ऐसा ही मामला बताऊँगा
लेकिन मेरे किस्से में देश बलात्कारियों के समर्थन में खड़ा है
मेरे किस्से में सरकार कोर्ट समाज कोई भी बलात्कार पीडित लड़कियों की तरफ नहीं है
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सामसेट्टी गांव में चार आदिवासी लड़कियों के साथ पुलिस वालों ने सामूहिक बलात्कार किया
लड़कियों ने कोर्ट में बलात्कारियों के खिलाफ अपने बयान दर्ज करवा दिये
सुकमा कोर्ट नें आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ वारंट निकाल दिये
पुलिस ने कोर्ट में जवाब दिया कि आरोपी पुलिस वाले फरार हैं
जबकि सभी आरोपी बलात्कारी थाने में रह रहे थे और हर महीने वेतन ले रहे थे
बलात्कारी पुलिस वालों में से एक तो पुलिस अधीक्षक का बाडी गार्ड ही था
हिन्दुस्तान टाइम्स नें छापा "फरार लेकिन ड्यूटी पर मौजूद "
इस बीच मैं दिल्ली आकर तत्कालीन केन्द्रीय गृह मन्त्री पी चिदम्बरम से मिला
मैनें चिदम्बरम को बलात्कार पीड़ित लड़कियों के बयान वाली सीडी दी
चिदम्बरम नें मेरे साथ धोखा किया
चिदम्बरम ने वह सीडी रमन सिंह को सौंप दी
रमन सिंह के आदेश पर 4OO सिपाहियों के साथ
बलात्कारी पुलिस वालों नें चारों बलात्कार पीड़ित लड़कियों का अपहरण किया और उन्हें दोरनापाल पुलिस थाने ले गये
पुलिस ने चारों पीड़ित लड़कियों के साथ पांच दिन तक थाने में दोबारा सामूहिक बलात्कार किया
पांच दिन तक मैं चिदम्बरम , गृह सचिव जी के पिल्लै , छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव , पुलिस महानिदेशक , कलेक्टर , पुलिस अधीक्षक को मदद के लिये फोन करता रहा
किसी नें उन चारों लड़कियों की मदद नहीं करी
अन्त में पुलिस नें चारों लड़कियों को लाकर गांव के चौराहे पर फेंक दिया ,
पुलिस नें गांव वालों को चेतावनी दी कि अब के बाद अगर हिमांशु से बात भी करी तो पूरे गांव को आग लगा दी जायेगी
बड़ी कम्पनियों के लिये ज़मीने छीनने के लिये कांग्रेस और भाजपा की सरकारें मिल कर आदिवासी माहिलाओं
से बलात्कार करवा रही हैं
ताकि आदिवासी डर कर अपना गांव छोड़ कर भाग जायें
मैं खुले आम नाम लेकर , आदिवासी लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में , भारत के काग्रेसी गृह मन्त्री और छत्तीसगढ़ के भाजपाई मुख्य मन्त्री का नाम ले रहा हूँ
इन लोगों में हिम्मत है तो ये लोग मुझ पर मुकदमा करें
लेकिन मैं जानता हूँ कि इन में ऐसा करने की हिम्मत नहीं है
क्योंकि ये लोग जानते हैं कि मैं अपनी सच्चाई साबित करने के लिये पीड़ित लड़कियों और सारे गांव वालों को कोर्ट के सामने पेश कर दूँगा
अगर आप पर कोई हमला करे तो आप पुलिस या सरकार के पास जायेंगे
लेकिन अगर पुलिस और सरकार ही आप पर हमला करे तो आप क्या करेंगे ?
हमने आदिवासियों के पास अपना जीवन और सम्मान बचाने का कोई रास्ता ही नहीं छोड़ा है
भारत का विकास बलात्कारों के आधार पर ही आगे बढ़ सकता है
किसी विकासवादी में दम हो तो एक भी ऐसी विकास परियोजना का नाम बता दे
जिसमें पुलिस यानि बन्दूकों का इस्तेमाल ना किया गया हो
अगर आप थोड़ा और कुरेदेंगे तो आपको अपने सिपाहियों द्वारा गरीबों के घर जलाने , बलात्कार हत्याओं और क्रूरताओं की वहाँ के लोगों के सीने में दफन कई कहानियाँ मिलेगी
लेकिन हम शहरियों को इन हारते और पिटते लोगों के पास जाने का मौका ही कहाँ मिलता है ?
पता नहीं हम लोग इन लोगों को अपने देश का हिस्सा कब स्वीकार करेंगे ?

हुर्रे का बेटा


सोनी सोरी की गोद में जो बच्चा है वह हुर्रे का बेटा है
वही वाली हुर्रे जो मर गई ၊
वही हुर्रे जिसके पेट पर पुलिस नें बन्दूक के बट से मारा था
तब यही बच्चा हुर्रे के पेट में था
इस बच्चे का पिता खेत में था
पुलिस अधिकारी इनाम के लालच में निर्दोष आदिवासियों को नक्सली कह कर जेल में डालते रहते हैं
इस बच्चे की मां नें अपने पति को छोड़ देने की प्रार्थना करी
बदले में पुलिस नें इसकी मां के पेट पर बन्दूक के बट से मारा
यह बच्चा वख्त से पहले पैदा हो गया
मां की मौत हो गई
पिता अभी भी जेल में है
सोनी सोरी इस बच्चे के दूध पाउडर , शहर आने जाने के लिये गाड़ी और इलाज की देखभाल कर रही है
आज यह बच्चा दन्तेवाड़ा लाया गया .
तब का चित्र
ये बन्दूकों की मार खाकर पैदा होने वाले बच्चे हैं

" कल्लूरी प्रिंटिग प्रेस "

आप में से किसी को अगर विज़िटिंग कार्ड , लेटर हेड , पैम्फलेट वगैराह छपवाने हों तो " कल्लूरी प्रिंटिग प्रेस " से छपवा सकते हैं
बस्तर के पुलिस आईजी कल्लूरी आजकल कागज़ छापने का काम कर रहे हैं
आपको याद होगा पुलिस ने आदिवासी लड़की मड़कम हिड़मे के साथ बलात्कार के बाद हत्या कर दी थी
सर्व आदिवासी समाज नें इसके विरोध में सोलह जुलाई को बस्तर बन्द करवाया जो बहुत ज़ोरदार रहा
पूरे बस्तर की जनता आदिवासियों के पक्ष में और पुलिस के खिलाफ सड़कों पर उतर आयी
आदिवासी युवाओं की एकता और ताकत देख कर पुलिस घबरा गयी
आदिवासियों के संगठन " सर्व आदिवासी समाज " को बदनाम करने के लिये पुलिस के आईजी कल्लूरी नें माओवादियों के नाम पर खुद ही एक पर्चा तैयार किया
इस पर्चे में पुलिस नें लिखा कि सोलह जुलाई वाला बस्तर बन्द माओवादियों के समर्थन से हुआ था
इस तरह पुलिस नें आदिवासी युवाओं को माओवादी केस में फंसाने की तैयारी कर ली है
अगर किसी को जालसाजी , षडयंत्र, फर्जी कागजात बनाना सीखना हो तो वह छ्तीसगढ़ पुलिस से ट्यूशन ले सकता है
लेकिन ये आदिवासी नौजवान तुम्हारी जालसाजी अब चलने नहीं देंगे
नीचे देखिये माओवादियों के नाम से पुलिस द्वारा तैयार किया हुआ फर्जी पर्चा

मरी गाय की खाल

मैं जब बस्तर में था तो आदिवासी अपनी मरी गाय की खाल चालीस या पचास रूपये में व्यापारी को बेच देते थे ၊
उसे कच्चा चमड़ा कहा जाता है
हमने अपने आश्रम मे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकि विभाग की मदद से चमड़ा पकानें का एक कार्यक्रम चलाया था ၊
इस कार्यक्रम में हम आदिवासी युवाओं को अपनी मरी गाय के चमड़े को पकाने यानी टैनिंग करने की तकनीक बताते थे ၊
पकाया हुआ चमड़ा 4०० रू के लगभग बिकता था
आदिवासी युवकों के साथ मैनें भी मरी गाय का चमड़ा छीलना और उसे पकाना सीख लिया
अब गुजरात में हिंदुत्ववादी लोगों ने गाय के नाम पर वोट बटोरने के लिये दलित युवाओं पर जो हमला किया
और उसके बाद जिस तरह दलित भाइयों नें मरी हुई गाय लाकर कलेक्टर व अन्य अधिकारियों के कार्यालय में डाल दी है
मैं दलित युवकों के इस कदम का समर्थन करता हूँ
मैं ब्राह्मण युवकों को मरी गाय का चमड़ा उतारना सिखाने का प्रशिक्षण देने के लिये तैयार हूं
अगर गाय हम सबकी माता है तो माता की सेवा में शर्म कैसी ?
इसी तरह टट्टी सफाई , नालियों की सफाई , गटर साफ करना , सड़कों पर झाडू लगाने का काम भी ब्राह्मणों , ठाकुरों , बनियों को मिल जुल कर करना चाहिये
सरकार के स्वच्छता अभियान में गांधी जी का चश्मा प्रतीक चिन्ह रूप में लगाया हुआ है ၊
तो भाई गांधी तो संडास सफाई का काम खुद करते थे
प्रतीक गांधी के इस्तेमाल करोगे और काम गोडसे वाले करोगे
ये नहीं चलेगा
संघ को हर शहर में एक चमड़ा शोधन केन्द्र बना देना चाहिये
जहाँ संघ के स्वयंसेवक गो माता का चमड़ा उतारें
स्वयंसेवकों को चमड़ा उतारने का प्रशिक्षण देने के लिये मैं तैयार हूँ ,
आइये भारत को समरस राष्ट्र बनायें

कश्मीर टाइम्स

सरकार ने कश्मीर टाइम्स पर पाबंदी लगा दी ၊
अनुराधा भसीन कश्मीर टाइम्स की संपादक है ၊
पिछले दिनों अनुराधा भसीन ने एक मजेदार किस्सा सुनाया ၊
करीब 4 साल पहले कश्मीर टाइम्स ने जम्मू में मेरा एक भाषण आयोजित करवाया था၊ मेरा भाषण करीब 1 घंटे चला ၊ भाषण के बाद कश्मीर टाइम्स के तत्कालीन संपादक श्री वेद भसीन ने कहा कि जम्मू के लोग कभी किसी का इतना लंबा भाषण नहीं सुनते၊ लेकिन आपकी बातें इतनी खतरनाक थी कि लोग आपके भाषण में हिले भी नहीं ၊
अगले दिन कश्मीर टाइम्स के अलावा किसी भी अखबार ने मेरे भाषण का कोई जिक्र तक नहीं छापा ၊
पिछले दिनों अनुराधा भसीन बता रही थी की उन्होंने एक पत्रकार से पूछा कि आपके अखबार में हिमांशु कुमार का भाषण क्यों नहीं छापा था ? उन पत्रकार महोदय ने कहा की पुलिस के CID विभाग से निर्देश आया था कि हिमांशु कुमार का भाषण न छापा जाए ၊ अनुराधा भसीन ने पूछा कि आप अखबार जनता के लिए निकालते हैं या ClD डिपार्टमेंट के लिए ?
अपने साहस और सच्चाई के लिए जाने माने अखबार कश्मीर टाइम्स को सरकार ने जप्त किया है तो मुझे यह मामला याद आ गया ၊
सच्चाई की कीमत हम सब को कभी न कभी चुकानी ही पड़ती है၊

हमला करने वाले लोगों के समर्थक

एक ऐसे समाज में जिसमें मेहनत करने वाले नीच जाति के माने जाते हों ၊
एक ऐसा समाज जिसमें मेहनत करने वाले मजदूर किसान खनिक मछुआरे गरीब हों ?
और जहां दूसरों के खनिज जंगल और पहाड़ों पर कब्ज़ा करने वाले अमीर हों ?
जहाँ अपने अलग धार्मिक विश्वास के कारण करोड़ों अल्पसंख्यकों को देशद्रोही कहा जाता हो
जहाँ संसाधन छीनने के लिये आदिवासी महिलाओं के साथ सशस्त्र बल सामूहिक बलात्कार करते हों
उस देश की राजनीति क्या होनी चाहिए ?
यही ना कि मेहनत करने वाले सब के बराबर माने जाएं ?
मेहनत करने वाले इज्जत की जिंदगी जी पाए ?
लेकिन जैसे ही आप समानता की राजनीति की कोशिश करते हैं ?
आप को नक्सलवादी ,विदेशी एजेंट ,कम्युनिस्ट कहकर गालियां दी जाती हैं ၊
और आप पर हमला किया जाता है ၊
यही इस देश का राजनीतिक संघर्ष है၊
अब सवाल यह है कि आप इस देश में राजनीतिक संघर्ष में शामिल है?
या राजनीतिक संघर्ष करने वाले लोगों पर हमला करने वाले लोगों के समर्थक हैं ?

इतिहास पर बातचीत

अपनी हाई स्कूल में पढने वाली बेटी के साथ इतिहास पर बातचीत 
अच्छा बताओ तुम्हें इतिहास में मुख्यतः क्या पढ़ाया जाता है ?
राजाओं की वीरता के किस्से .
इतिहास में राजों के वीरता के किस्से ही क्यों पढाये जाते हैं ?
हमारे इतिहास में उस समय के किसानों के बारे में या कारीगरों , मजदूरों या औरतों की हालत के बारे में क्यों नहीं पढ़ाया जाता ?
अगर तुम वेदों के समय से इतिहास को देखना शुरू करोगी , तो तुम देखोगी कि वेदों में भी राजाओं की स्तुतियाँ हैं , यज्ञों का वर्णन है , बारिश , आग , हवा को देवता और राजा मान कर उनकी तारीफें हैं 
पूरा इतिहास बोध हमारे राजाओं की वीरता और मर्दानगी के वर्णन में डूबा हुआ है 
लेकिन वेद यह नहीं बताते कि उस समय मनुष्यों को कैसे दास बनाया जाता था ?
वेद यह भी नहीं बताते कि उस समय धनी लोग कितनी पत्नियां रखते थे ?
वेद किसानों और दस्तकारों की आर्थिक हालत के बारे में भी नहीं बताते ?
उसके बाद का इतिहास भी राजाओं की वीरता की कहानियों का ही वर्णन करते हैं .
आम जनता की हालत के बारे में इतिहास मौन रहता है .
सारे धर्मों के धर्म ग्रन्थों को भी इतिहास की पुस्तक के रूप में देखो 
सभी धर्मों के धर्मग्रंथ पुरोहितों और राजाओं के वर्णनों से भरे हुए हैं 
ऐसा क्यों हुआ ? इसके बारे में हमें ज़रूर जानना चाहिए .
असल में पूरे मानव जाति की सभ्यता का विकास अन्याय पूर्ण व्यवस्था के विकास का इतिहास है 
ध्यान से देखो जैसे जैसे सभ्यता का विकास हुआ 
वैसे वैसे मेहनत करने वाले दुखी बनते चले गए 
जैसे जैसे सभ्यताका विकास हुआ आराम से बैठने वाले मज़े की हालत में हो गए 
पहले तो प्राकृतिक संसाधन सभी मनुष्यों के थे 
लेकिन सभ्यता के विकास के साथ ज़मीनों पर मनुष्य की मल्कियत हो गयी 
इसके बाद मेहनत करने वाले लोग तो मजदूर बन गए और ज़मीन का मालिक बिना मेहनत किये ही मज़े में जीने लगा 
मेहनत करने वाले लोग गुलाम बनाए गए 
और गुलाम बनाने वाले मज़े करने वाले बन गए 
औरतों को मनुष्य के बराबरी के स्थान से नीचे गिरा कर पुरुष की संपत्ति के वारिस पैदा करने वाली मशीन और 
खेती में काम करने वाली दासी बना दिया गया 
इसी के साथ साथ जो इतिहास लिखा गया 
वह पुरुषों की वीरता , पुरुषों के एश्वर्य , और पुरुषों की लड़ाइयों के बारे में वर्णन करने वाला इतिहास था 
सारा धर्म भी इसी तरह के वर्णनों से भरा हुआ है 
इसी लिए सारे धर्म गरीब विरोधी . मेहनतकश विरोधी और औरतों के विरोधी हैं 
करीब बीस पच्चीस साल पहले तक आम लोग इतिहास के अध्ययन से बाहर थे 
उसके बाद रोमिला थापर , इरफ़ान हबीब , बिपिन चन्द्रा जैसे इतिहासकारों का युग शुरू हुआ 
इन इतिहासकारों नें इतिहास को एक नए नज़रिए से देखने की शुरुआत करी 
इन्होनें इतिहास के अलग अलग समय में किसानी का इतिहास , औरतों की हालत का इतिहास , दस्तकारी का इतिहास, अन्याय का इतिहास के बारे में शोध करने और लिखने की शुरुआत करी .
अगर तुम आज की राजनीति की भी हालत देखोगी तो तुम्हें इतिहास की गलत दिशा की झलक समझ में आ सकती है 
जैसे आज राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा किस बारे में बात करते हैं ? 
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा बात करते हैं हमारी सेना की वीरता की 
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा कभी भी समाज में फैले अन्याय की बात नहीं करेंगे 
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा कभी भी दलितों के साथ होने वाले अन्याय की चर्चा नहीं करेंगे 
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा कभी भी आदिवासियों के साथ होने वाले अन्याय की चर्चा नहीं करेंगे 
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा आपके सामने एक नकली दुश्मन खड़ा करेगी 
जैसे कहीं वह मुसलमानों को ,कहीं आदिवासियों को , कहीं ईसाईयों को दुश्मन के रूप में खड़ा करेगी 
और फिर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा सेना और पुलिस को आपके एकमात्र रक्षक के रूप में पेश करेगी 
ऐसा करके फिर से वही पुराना इतिहास वाला खेल खेला जाता है 
असली अन्याय से ध्यान हटा कर नकली वीरता , पौरुष , और गर्व को आपके जीवन का मुद्दा बना दिया जाना 
आप को बहुत चालाकी से राम और कृष्ण की वीरता की पूजा करने में बैठा दिया गया है 
और आप अपने आस पास होने वाले अन्याय से ध्यान हटा कर एक नकली गर्व में भरे हुए जीवन काट कर मर जाते हैं 
इसलिए इतिहास को नई समझ के साथ देखने की ज़रूरत है .

सोने की चिडियाँ

यहां डाल डाल पर सोने की चिडियाँ करती हैं बसेरा
और बाकी के मुल्कों पर हाड़ मांस की चिडियाँ बसेरा करती हैं
ये देश है वीर जवानों का
बाकी के देश डरपोक बुड्ढों के हैं
मेरे देश की धरती सोना उगले
बाकी के देशों की धरती सिर्फ अनाज उगलती है
यहाँ राम अभी तक है नर में नारी में अभी तक सीता है
बाकी के देश में नर और नारी तुच्छ जीव हैं
होठों पे सच्चाई रहती है, जहाँ दिल में सफ़ाई रहती है
बाकी के देशों के लोगों के होठों पे झूठ और दिल में गंदगी रहती है
काले-गोरे का भेद नहीं, हर दिल से हमारा नाता है
बाकी के देशों के लोगों के बीच में जात पात का नाता है
(अब इस बचकानी बातों से बाहर निकलो यार
सारी दुनिया में तुम्हारे जैसे ही इंसान रहते हैं )

गौरव की पुनर्स्थापना

हमें भारत के पुराने गौरव की पुनर्स्थापना करनी है या आज की समस्याओं का समाधान करना है ?
आज की समस्याओं का अर्थ है भारत में आर्थिक राजनीतिक और सामाजिक न्याय की स्थापना ၊
भारत में मेहनत करने वाले बुरी हालत में है
भारत में मेहनत करने वालों को नीच जात का माना जाता है
भारत में मेहनत करने वाले मजदूर की हालत ख़राब है
भारत में किसान की हालत खराब है और वह आत्महत्या करने को मजबूर है
भारत में औरतों की हालत बहुत खराब है
भारत में अल्पसंख्यकों , मुसलमानों , इसाईयों का हाल खराब है
यह है आज की समस्याएं जिनका हमें निदान करना है ၊
लेकिन जब आप इन समस्याओं को हल करने की कोशिश करेंगे तो पहले से मजे कर रहे लोगों को तकलीफ होगी ၊
बिना मेहनत किए मजे करने वाला धनी आपके सुधारों से परेशान हो जाएगा၊
महिलाओं को घरों में गुलामी की हालत में रखकर मजे करने वाला मर्दवादी वर्ग परेशान हो जाएगा ၊
काम करने वाले लोगों को नीच जात कहकर मजे करने वाला सवर्ण वर्ग आपके सुधारों से परेशान हो जाएगा ၊
तो जैसे ही आप आज की समस्याओं का हल करने जाएंगे यह धनी पुरुषवादी और सवर्ण जातियां आप पर हमला कर देंगे ၊
आपको नक्सली देशद्रोही विदेशी एजेंट कहा जाएगा
यह बिना मेहनत किए धनी बना हुआ, पुरुषवादीऔर सवर्ण जातियां आज के हालात में बदलाव को रोकने के लिए एक चालाकी भरी राजनीति करते हैं ၊
यह कहते हैं कि आज की राजनीति का उद्देश्य समानता और सामाजिक आर्थिक राजनैतिक न्याय की स्थापना नहीं है ၊
बल्कि हमारा मुख्य लक्ष्य भारत के प्राचीन गौरव की पुनर्स्थापना है၊
यह एक झूठा राजनैतिक खेल है ၊
क्योंकि भारत का कोई प्राचीन गौरवशाली इतिहास नहीं है ၊
यह एक काल्पनिक धारणा है ၊
क्योंकि अगर आप वेदों का इतिहास माने तो आप उसमें किसानों की हालत दस्तकारों की हालत औरतों की हालत मनुष्य को दास बनाने की हालत के बारे में कुछ भी नहीं पाते हैं၊
उस समय के आम लोगों का जीवन कैसा था इस बारे में आपको कुछ भी नहीं मिलता है ၊
भारत का कोई भी अतीत गौरवशाली नहीं था၊
यहां दास प्रथा थी ၊ धनी लोग कई कई शादियां करते थे၊ मेहनत करने वालों को नीची जाति माना जाता था ၊ दलितों की अलग बस्तियां थी ၊ और उनका भयानक शोषण था၊ उन्हें शिक्षा , धन कमाने और दूसरे लोगों के साथ बराबरी करना मना था ၊
अगर भारत का इतिहास गौरवशाली होता तो वह आज के समाज में हमें दिखाई देता ၊
हमें जो दिखाई देता है, वह दिखाई देता है कि भारत के घरों में औरतों की गुलामी၊
हमें दिखाई देती है , मेहनत करने वाले लोगों को दलित माना जाना और उनके साथ जानवरों जैसा सलूक ၊
अगर भारत का अतीत गौरवशाली होता तो आज का भारत भी औरतों और दलितों के साथ बराबरी का बर्ताव करता , औरत और दलितों की हालत अच्छी होती ၊
हमारे आज के समाज की हालत से हमें हमारे अतीत का पता चलता है ၊
असल में अतीत के गौरव की पुनर्स्थापना का भ्रम आज के समाज के सुधारों को रोकने के लिए करी जाने वाली राजनीति है ၊
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मर्दवादी अमीर और सवर्ण जातियों का समूह है၊
यह लोग भारत की आजादी से पहले से ही भारत में सत्ता की हालत में रहे हैं ၊ यह शासक वर्ग है ၊
यह नहीं चाहते कि भारत में दलित, आदिवासी , किसान और औरतें परंपरागत सत्ता को मिटाकर एक समतामूलक न्याय प्रिय समाज की स्थापना करें၊
इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी चालाकी से नए सुधारों को रोकने के लिए, हिंदू गौरव और भारत की प्राचीन संस्कृति की झूठी परिकल्पना की राजनीति करती है ၊
हमें इस चालाकी को समझना होगा और नौजवानों को इस प्राचीन गौरव के भ्रम से निकालकर उसे आज की समस्याओं के समाधान करने वाली राजनीति से जोड़ना होगा၊